कलयुग के दधीचि बन गए देवी प्रसाद शुक्ला, मरने के बाद देहदान करके पेश किया मिसाल

रांची,(झारखंड)। हमारे समाज और आसपास में कई ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने अपने पूरे जीवन काल दूसरों की सेवा में ही लगा दिया है और अंत समय में चिरनिद्रा में सो जाते है। लेकिन ऐसे लोगों से भी आगे वे लोग निकल जाते हैं जो मरने के बाद भी अपने शरीर को समाज के लिए छोड़ देते हैं। हम बात कर रहे हैं देहदान की। हमारे बीच एक ऐसी ही शख्सियत थे देवी प्रसाद शुक्ला। देवी प्रसाद शुक्ल ने जीवन पर्यंत दूसरों की सेवा और सहायता में गुजार दिया। विश्व हिंदू परिषद झारखंड के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष 93 वर्षीय देवी प्रसाद शुक्ला ने मरने के बाद भी दूसरों के लिए एक मिसाल कायम कर दिया है। देवी प्रसाद शुक्ला ने अपने जीवन में ही देहदान का निर्णय लिया था और मृत्यु के बाद उनके सपने को उनके परिजनों ने पूरा किया।
परिजनों ने पार्थिव शरीर को एनाटॉमी विभाग को सौंपा
93 वर्षीय देवी प्रसाद शुक्ल का शनिवार को रांची में निधन हो गया था। उनके निधन बाद उनके परिजनों ने रविवार रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स को देहदान कर दिया है। देवी प्रसाद शुक्ला का शनिवार को नागरमल मोदी सेवा सदन में निधन हो गया था। देवी प्रसाद शुक्ला ने अपने जीवन काल में ही देहदान का संकल्प लिया था जिसके बाद उनकी इच्छा अनुसार उनका देह मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए दान कर दिया गया। रविवार को आज सुबह 11 बजे उनका पार्थिव शरीर रिम्स के एनाटॅामी विभाग को सौंप दिया गया।
एमबीबीएस स्टूडेंट्स करेंगे अध्ययन
एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को शारीरिक संरचना की शिक्षा देने में इनके शरीर का उपयोग किया जाएगा। एनाटॉमी विभाग में छात्रों को शरीर का वाह्य, आंतरिक और सूक्ष्मदर्शी अध्ययन कराया जाएगा।
रिम्स में अब तक 50 ने देहदान का लिया संकल्प
रिम्स के वेबसाइट पर देहदान (बॉडी डोनेशन) फॉर्म उपलब्ध है। देहदान के इच्छुक लोग इस फॉर्म को दो सेट में भर कर रिम्स में जमा कर सकते हैं। संकल्प लेने वाले लोगों में किसी की मृत्यु के बाद सूचना मिलने पर रिम्स से एम्बुलेंस भेजा जाता है। परिजनों से इस काम के लिए एक भी रुपये नहीं लिए जाते हैं। रिम्स में अब तक 50 लोगों ने देहदान का संकल्प लिया है और 7 देह रिम्स को प्राप्त हो चुके हैं।

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