बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में हेराफेरी का खुलासा, सीसीटीवी फुटेज में नोटों के बंडल और आभूषण गायब करने के मिले प्रमाण
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी का खुलासा सीसीटीवी फुटेज से हुआ है, जिसमें रोजाना दान को ठिकाने लगाते देखा गया।

गोपेश्वर/उत्तराखंड। बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एसआईटी जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई बार नोटों के बंडल और सोने-चांदी के उपहार ठिकाने लगाने की पुष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार एसआईटी को 21 जून से संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई गई है, जिसमें 22, 25 और 29 जून के साथ ही 2 जुलाई की गिनती के दृश्य शामिल हैं। मात्र 13 दिनों की इस फुटेज में हर दिन चढ़ावे में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि गायब 32 दिनों की फुटेज में बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
एसआईटी ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की नई और पुरानी डीवीआर अपने कब्जे में ले ली है। जांच के दौरान मंदिर समिति के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल और मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान की संलिप्तता सामने आई है। दोनों पर चढ़ावे को ठिकाने लगाने में भूमिका होने के आरोप हैं।
एसआईटी प्रभारी एवं डीएसपी मदन बिष्ट ने बताया कि समिति द्वारा केवल 13 दिनों की फुटेज उपलब्ध कराई गई है, जबकि शेष 32 दिनों की फुटेज गायब है। मंदिर समिति का कहना है कि तकनीकी कारणों से फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी। हालांकि एसआईटी ने 45 दिनों की डीवीआर कब्जे में लेकर विशेषज्ञों की मदद से गायब फुटेज को रिकवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मामले के सामने आने के बाद अब पूरे यात्राकाल की जांच की मांग तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले गए थे। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान शुरू से ही हेराफेरी की जा रही थी, जबकि संबंधित अधिकारी इस पर मौन रहे।
बताया गया कि पहले मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्टोरेज क्षमता चार टेराबाइट थी, जिसे अब बढ़ाकर 32 टेराबाइट कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




