महाराष्ट्र में भी कोविड मामलों में बढ़ोतरी, विशेषज्ञ बोले—नई लहर नहीं, सामान्य उतार-चढ़ाव
महाराष्ट्र में पिछले 10 दिनों में कोविड-19 के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग इसे नई लहर नहीं बल्कि वायरस के उतार-चढ़ाव का हिस्सा मान रहा है।

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में पिछले कुछ दिनों से हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इसे नई लहर नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार यह स्थिति इन्फ्लूएंजा की तरह वायरस के सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक राज्य में कोविड-19 के कुल 48 मामले सामने आए हैं और किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। जुलाई महीने में सबसे अधिक 21 मामले दर्ज किए गए हैं।
जहांगीर अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष चौधरी ने बताया कि पिछले 8-10 दिनों में उनके अस्पताल में ही 7-8 मरीज कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक ही अस्पताल में इतने मामले सामने आने से संकेत मिलता है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी मामले हल्के हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मरीजों में खांसी, सर्दी, गले में खराश और थकान जैसे सामान्य लक्षण देखे जा रहे हैं, जो आमतौर पर 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रमण ओमिक्रॉन वेरिएंट से भी हल्का प्रतीत हो रहा है।
डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि कई मरीज कोविड जांच के लिए विशेष रूप से नहीं आए थे, बल्कि अन्य जांच या ऑपरेशन से पहले किए गए टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। सर्दी-खांसी के लक्षण होने पर अधिकांश लोग टेस्ट नहीं कराते, जिससे वास्तविक मामलों की संख्या अधिक हो सकती है।
सिम्बायोसिस और जुपिटर हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डॉ. सुजाता रेगे के अनुसार पहले कम टेस्टिंग के कारण मामले सामने नहीं आते थे, लेकिन अब अपर रेस्पिरेटरी पैनल टेस्ट बढ़ने से कोविड के केस भी अधिक दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड अब एक सामान्य श्वसन वायरस की तरह हो गया है, जो समय-समय पर बढ़ता और घटता रहता है।
जुपिटर हॉस्पिटल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. श्रद्धा कुलकर्णी ने भी बताया कि फिलहाल सभी मरीज हल्के लक्षण वाले हैं, लेकिन अगले कुछ हफ्तों तक स्थिति पर नजर रखने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पतालों में इस समय इन्फ्लूएंजा, डेंगू, चिकनगुनिया और टाइफाइड के मामले भी बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खांसी, सर्दी या बुखार होने पर मास्क का उपयोग करें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतें। उनका मानना है कि कमजोर इम्युनिटी और नए वेरिएंट के कारण हर एक-दो साल में इस तरह के मामले सामने आ सकते हैं, जैसा कि फ्लू के साथ होता है।




