कानपुर में बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, 289 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बरामद ,17 फरार

कानपुर में 289 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड के साथ एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने सरगना शैलेंद्र सहित 20 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 17 फरार हैं।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर नगर और देहात में साइबर ठगी के कई ‘जामताड़ा’ जैसा नेटवर्क है। पुलिस ने घाटमपुर और रेउना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 289 प्री-एक्टिवेट सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े बड़े नेटवर्क का पता चला है। मामले में 17 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। 230 पुलिसकर्मियों व ड्रोन की निगरानी के बीच दबोचकर जेल भेजे गए सरगना शैलेंद्र समेत 20 साइबर अपराधियों ने पुलिस को बताया है कि कानपुर नगर व देहात के ग्रामीण क्षेत्रों में कई और जामताड़ा हैं। पुलिस अब 17 फरार अपराधियों की तलाश में छापेमारी के साथ उस तंत्र की तलाश कर रही है, जिसकी मदद से आरोपित ठगी गई रकम को ठिकाने लगाते थे। इसके लिए मोबाइल कंपनियों, बैंकों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
वहीं, प्रतिबिंब एप के जरिये साइबर ठगी के हाटस्पाट के रूप में सामने आए घाटमपुर के रेउना में 289 प्री एक्टिवेटेड सिम सक्रिय मिले हैं। झारखंड का जामताड़ा शहर साइबर ठगों का बड़ा अड्डा माना जाता है। पुलिस को पता चला है कि यहां के गिरोह ने वहां के लोगों से भी ठगी की है, जिसकी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
पहले ठगी गई रकम म्यूल अकाउंट में भेजी जाती थी, लेकिन अब साइबर अपराधी तकनीक का प्रयोग कर प्री एक्टिवेटेड सिम द्वारा आनलाइन पेमेंट एप की मदद से अकाउंट खोलकर उनमें रुपये मंगा रहे हैं। इसके बाद रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर ठिकाने लगा देते हैं। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन में एयरटेल पेमेंट, नावी, स्लाइस व फियो पेमेंट के अकाउंट मिले हैं। रेउना स्थित बैंक आफ बड़ौदा शाखा के साथ लगभग सात बैंकों में खोले गए 58 खातों में 40 म्यूल अकाउंट हैं। इनकी जांच की जा रही है।
पुलिस का अगला टास्क सचेंडी क्षेत्र के गज्जापुरवा, बंधीपुरवा, खेमपुर, मोहनपुर, कैंधा व कानपुर देहात के गजनेर, दुर्गापुरवा, मन्नहापुर गांव हैं, जिनकी निगरानी कराई जा रही है, क्योंकि ये साइबर अपराधी ऐसे हैं कि कुछ दिन बाहर रहते हैं और माहौल शांत होते ही फिर गांव आ जाते हैं। प्रतापगढ़ के एक पीड़ित सफाईकर्मी ज्ञानदास ने दो साल पहले कानपुर देहात के ठगों का शिकार होने के बाद गाढ़ी कमाई के 85 हजार रुपये गंवाने से तनाव में आकर 30 जनवरी,2025 को आत्महत्या कर ली थी।
ड्रग्स बेचने की धमकी देकर वसूली की
ठगों ने 26 से 28 जनवरी के बीच उसे 32 बार काल कर ड्रग्स बेचने में फंसा देने की धमकी देकर वसूली की थी। इसके बाद प्रतापगढ़ पुलिस जांच करते हुए जब वहां पहुंची तो पूरा गांव एकजुट हो गया था। इस पर पुलिस को फायरिंग तक करनी पड़ी थी, तब आरोपित पकड़े जा सके थे। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ गैंग्सटर लगाया जाएगा व ठगी से अर्जित संपत्तियां भी सीज की जाएंगी। 289 प्री-एक्टिवेटेड सिमकार्ड से ठगी के लिए काल की गईं। ये प्री-एक्टिवेटेड सिम अपराधियों के पास कैसे आए, सेवाप्रदाता कंपनी कौन हैं, इसकी जांच की जा रही है।
साइबर ठगों से पीड़ित कर चुका आत्महत्या
प्रतापगढ़ जनपद के सुवंसा निवासी सफाईकर्मी ज्ञानदास ने साइबर ठगों की प्रताड़ना से तंग आकर पिछले साल 30 जनवरी को आत्महत्या कर ली थी। साइबर ठग उसे ड्रग्स बेचने में फंसा देने की धमकी देकर रुपये वसूल रहे थे। पहले दिन 20 हजार रुपये, फिर 45 हजार फिर 20 हजार रुपये ठगों ने अपने खातों में ट्रांसफर करवाए। घटना को लेकर प्रतापगढ़ पुलिस जांच करने पहुंची तो पूरा गांव एकजुट हो गया था।
इस दौरान पुलिस को बचने के लिए फायरिंग तक करनी पड़ी थी, जिसके बाद आरोपित दबोचे गए। साइबर अपराधियों ने ज्ञानदास के जीवित रहते तो वसूली की उसके मरने के बाद फोन किया। उन्होंने ज्ञानदास के मोबाइल पर 26 से 28 जनवरी के बीच 32 बार काल की। 30 जनवरी 2025 को ज्ञानदास ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद भी साइबर उनके मोबाइल पर स्वजन को ज्ञानदास समझकर धमका रहे थे कि वह रुपये क्यों नहीं भेज रहा है। बस इसी बात से परिवार को पता चला कि पूरी घटना क्या और उन्होंने पुलिस से मदद ली।
जांच पड़ताल के पहले ही दिन सवालों के घेरे में क्षेत्रीय बैंक
एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि पुलिस ने गुरुवार को रेउना स्थित ग्रामीण बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में जाकर साइबर ठगों के खातों की पड़ताल की है। इन दोनों बैंकों में आरोपितों के 13 बैंक खाते मिले हैं। इनमें करीब 22 लाख रुपये हैं। वहीं एक और चौकाने वाली जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। इन बैंकों में 12 खाते ऐसे हैं, जिन्हें साइबर ठगी की शिकायत के बाद फ्रीज करा दिया गया था। इन खातों में भी करीब 13.5 लाख रुपये हैं। पुलिस अब विशेष रूप से इन फ्रीज खातों के बारे में जानकारी ले रही है कि यह खाते किनके नाम पर खोले गए थे और इनके फ्रीज होने के बाद संबंधित खाता धारकों ने क्या किया। पुलिस को अनुमान है कि इस कड़ी को जोड़ने से साइबर ठगों के मददगार भी सामने आ सकते हैं।
पुलिस को कुछ साइबर ठगों के बैंक खातों की जानकारी भी मिली है। सात खातों में करीब 22.5 लाख रुपये जमा हैं। पुलिस इन खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया कर रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि इस मामले में साइबर ठगों के जनपद से खात्मे की निर्णायक रणनीति बनाई जा रही है। साइबर ठग जहां भी हैं, उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया जाएगा। पुलिस आयुक्त ने बताया कि रेउना, भैलामऊ, रठिगांव और गुजैनी की ग्रामीण बैंकों से यह जानकारियां सामने आई हैं।

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