दिल्ली में महिला वकील पर पति के जानलेवा हमला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, पुलिस कमिश्नर को दिए सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में एक महिला वकील पर पति द्वारा किए गए क्रूर हमले का स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी से जांच कराने, पीड़िता को 3 लाख रुपये की अंतरिम सहायता देने और अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार की जांच के आदेश दिए हैं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक महिला वकील पर उसके पति द्वारा कथित तौर पर किये गए क्रूर कातिलाना हमले पर सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच डीसीपी या एसीपी रैंक की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जहां तक हो महिला पुलिस अधिकारी को सौंपने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही घायल महिला के इलाज और बेटियों की देखभाल को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) को तत्काल तीन लाख रुपये अंतरिम वित्तीय मदद के रूप में पीडि़ता के खाते में डालने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च अदालत ने तीन अस्पतालों द्वारा घायल महिला को भर्ती करने और इलाज से मना कर लौटा दिये जाने के मामले में भी पुलिस से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। ये आदेश सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की वकील स्नेहा कालिता की ओर से महिला वकील पर हुए हमले के बारे में सीजेआई को भेजे गए पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिए। कोर्ट ने कालिता को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्ति किया है।
इससे पहले मामले पर सुनवाई के दौरान वकील स्नेहा कालिता ने कोर्ट से कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है इसमें दिल्ली की एक महिला वकील पर बड़ी क्रूरता के साथ धारदार हथियार से हमला किया गया है जिससे उसे गंभीर चोटें आयी हैं। घायल महिला का अभी दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। कालिता ने पत्र के साथ घायल महिला वकील के फोटो भी लगाए थे।
दिल्ली सरकार की ओर से पहले ही कोर्ट में एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी मौजूद थे। कोर्ट को बताया गया कि घटना की खजूरी खास थाने में एफआइआर दर्ज है और मुख्य आरोपी पति को 25-26 अप्रैल की रात ही गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप सास ससुर पर भी हैं लेकिन वो अभी फरार हैं।
वकील कालिता ने कोर्ट को बताया कि पीडि़त महिला की तीन बेटियां हैं। 12 वर्ष, चार वर्ष और एक वर्ष की। हमले के बाद सास ससुर चार और एक वर्ष की बच्ची को ले गए जबकि बड़ी 12 वर्ष की बेटी को पति ने निराश्रित गली में छोड़ दिया था जिसे बाद में पुलिस ने ढूंढ़ा और अब वह नाना नानी के परिवार के साथ है। लेकिन दोनों छोटी बच्चियों का पता नहीं है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों छोटी बच्चियों का पता लगाया जाए और अगर वे दादा-दादी के साथ हैं और ठीक देखभाल हो रही है, तो अगले आदेश तक दोनों बच्चियों को वहीं रहने दिया जाए। और बड़ी बेटी जो नाना-नानी के साथ है वो फिलहाल उन्हीं के पास रहेंगी।
कोर्ट ने तीन अस्पतालों जीटीबी अस्पताल, कैलाश दीपक अस्पताल और आरके अस्पताल द्वारा घायल महिला को इलाज देने से इन्कार करने की शिकायत की भी जांच करने का निर्देश दिया है और अगली तारीख पर रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 11 मई को तय करते हुए कोर्ट ने जांच अधिकारी को अगली तारीख पर जांच की स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button