नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का खेल, सड़क खोदाई से ग्रामीण परेशान
केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन पर ठेकेदारों की नजर, घटिया पाइप लाइन से योजना खतरे में

- गुणवत्ता विहीन पाइप लाइन बिछाने से भविष्य में जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका
- बिना लोक निर्माण विभाग की अनुमति, दो से तीन किलोमीटर सड़क खोदी गई
- अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों की पांचों उंगलियां घी में
- ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, प्रशासन अब तक मौन
- 2019 से शुरू हुई योजना 2024 तक हर घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य, लेकिन भ्रष्टाचार बना रोड़ा
शोभित शर्मा,(खड़गवां/छत्तीसगढ़)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत खड़गवां मुख्यालय और आसपास के गांवों में नल-जल योजना का कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा पाइप लाइन बिछाने में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है और न ही विभागीय मानकों का पालन।
खड़गवां मुख्यालय से गुजरने वाले राज्य मार्ग के किनारे महज़ कुछ फीट की दूरी पर सड़क की खोदाई कर पाइप लाइन बिछाई जा रही है। दो से तीन किलोमीटर तक सड़क खोद दी गई है, लेकिन लोक निर्माण विभाग के सब इंजीनियर को इसकी जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने मौके पर मौजूद ठेकेदार के मुंशी से अनुमति पत्र दिखाने को कहा तो उसने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की अनुमति होने की बात कही। सवाल यह है कि सड़क खोदाई की अनुमति लोक निर्माण विभाग से होनी चाहिए, जबकि ठेकेदार ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का हवाला दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पाइप लाइन को जिस गहराई और मानक के अनुसार बिछाया जाना चाहिए, उसका पालन नहीं किया जा रहा है। कई जगह पाइप लाइन केवल नाम मात्र के लिए दबाई गई है, तो कहीं जमीन के ऊपर से ही दिखाई दे रही है। इससे भविष्य में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। साथ ही जब राज्य मार्ग का चौड़ीकरण होगा, तब यह पाइप लाइन पूरी तरह नष्ट हो सकती है, जिससे जल आपूर्ति बाधित होगी।
2019 से शुरू हुई जल जीवन मिशन योजना का लक्ष्य 2024 तक हर घर तक नल से पानी पहुंचाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध कराया है। लेकिन मनेंद्रगढ़ उपखंड में ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया पाइप लाइन बिछाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी निर्माण कार्य का निरीक्षण नहीं करते, जिससे ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदारों को संरक्षण दे रहे हैं। जिला प्रशासन ने अब तक इस ओर संज्ञान नहीं लिया है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो नल-जल योजना का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एसडीओ संजय भरिलया से सड़क खोदाई के संबंध में अनुमति लेने की जानकारी चाही तो उन्होंने ने कहा कि हमारे द्वारा सड़क खोदाई के संबंध में कोई अनुमति नहीं दी गई है।





