कौशांबी में खाद्यान्न की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा, उचित दर विक्रेता पर कड़ी कार्रवाई

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशांबी/उत्तर प्रदेश। जनपद के चायल विकासखंड अंतर्गत नीबी शाना गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन व्यवस्था) में भारी अनियमितता और खाद्यान्न की कालाबाजारी का गंभीर मामला उजागर हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए औचक निरीक्षण में उचित दर की दुकान से बड़े पैमाने पर खाद्यान्न स्टॉक गायब पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित उचित दर की दुकान के अभिलेखों और भौतिक सत्यापन में भारी अंतर पाया गया। अभिलेखों के अनुसार गोदाम में कुल 66 क्विंटल खाद्यान्न उपलब्ध होना चाहिए था, जिसमें 26 क्विंटल गेहूं और 40 क्विंटल चावल शामिल थे। हालांकि निरीक्षण के समय यह स्टॉक मौके पर नहीं मिला, जिससे प्रथम दृष्टया खाद्यान्न के दुरुपयोग और कालाबाजारी की आशंका प्रबल हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित उचित दर विक्रेता शशिकला का अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश भी दे दिए हैं, ताकि इसमें संलिप्त अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सके।
जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) मंगेश मौर्य ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब एवं पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस कार्रवाई के बाद जिले भर के उचित दर विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने सभी विक्रेताओं को पारदर्शिता बनाए रखने और निर्धारित मानकों के अनुसार ही वितरण करने के निर्देश दिए हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह की सख्ती से ही कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है और पात्र लाभार्थियों को उनका हक समय पर मिल सकेगा।




