बुंदेलखंड रचेगा इतिहास, पहली बार एक साथ दो चेहरे पहुंच सकते हैं राज्यसभा
इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब बुंदेलखंड अंचल से एक साथ दो नेता राज्यसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा के महेश केवट और रजनीश अग्रवाल समेत तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।

सागर/मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड अंचल के नाम एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार बुंदेलखंड से एक साथ दो नेता राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करते नजर आ सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए सागर जिले के मंडी बामोरा निवासी और भाजपा प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल तथा निवाड़ी जिले के ओरछा निवासी एवं मप्र मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है।
इस घोषणा के बाद पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन और उससे जुड़े तकनीकी व कानूनी पहलुओं के चलते स्थिति स्पष्ट होने के बाद दोनों भाजपा उम्मीदवारों का उच्च सदन में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। यदि कांग्रेस को न्यायालय से राहत नहीं मिलती है तो तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा के इस फैसले से बुंदेलखंड के वैश्य, व्यापारी और ओबीसी समाज को बड़ा संदेश दिया गया है। खास बात यह भी है कि रजनीश अग्रवाल पिछले लोकसभा चुनाव में सागर सीट से टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने संगठन के लिए लगातार काम किया। अब उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने उनके समर्पण को सम्मान दिया है।
वहीं महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने केवट समाज सहित पिछड़े वर्गों को साधने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी नेतृत्व का यह कदम सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इतिहास पर नजर डालें तो बुंदेलखंड से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड अब तक कांग्रेस के नाम रहा है। छतरपुर के चतुर्वेदी परिवार से विद्यावती चतुर्वेदी दो बार राज्यसभा सदस्य रहीं, जबकि उनके पुत्र सत्यव्रत चतुर्वेदी भी 2006 से 2018 तक उच्च सदन में रहे। इस तरह लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के पास रहा, लेकिन भाजपा ने पहली बार स्थानीय और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देकर इस परंपरा को तोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
रजनीश अग्रवाल ने उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि यह केवल भाजपा में ही संभव है, जहां बिना लॉबिंग के एक साधारण कार्यकर्ता के काम को पहचान मिलती है। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि वह इस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह चुनाव निर्विरोध संपन्न होता है तो बुंदेलखंड के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जो क्षेत्र की राजनीति में नई दिशा तय करेगा।




