यूपीआई भुगतान पर बड़े लेनदेन के बाद लग सकता है मामूली शुल्क, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
लोकसभा में पेश एक बिल के अनुसार, यूपीआई भुगतान लेने वाले व्यापारियों को एक निश्चित सीमा के बाद बैंक को मामूली शुल्क देना पड़ सकता है।

नई दिल्ली/एजेंसी। आने वाले समय में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए भुगतान लेने वाले व्यापारियों को एक निश्चित सीमा से अधिक के लेनदेन पर बैंक को मामूली शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि, इस प्रस्तावित बदलाव का असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और उन्हें पूर्व की तरह ही पूरी राशि का भुगतान करना होगा।
मंगलवार को लोकसभा में वित्त मंत्रालय की ओर से टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया गया, जिसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव शामिल है। इस संशोधन के जरिए यूपीआई और रुपे कार्ड से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो सकता है।
वर्तमान में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत बैंक या सेवा प्रदाता कंपनियां यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं वसूल सकती हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद इस व्यवस्था में संशोधन संभव होगा।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यूपीआई संचालन की नियामक संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। इन दिशा-निर्देशों में शुल्क की दर और लागू होने वाली सीमा तय की जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा, न कि उपभोक्ताओं पर। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक 3000 रुपये का सामान खरीदता है, तो उसे पूरा 3000 रुपये ही चुकाना होगा।
इसके अलावा, प्रस्तावित संशोधन के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारी भीम यूपीआई क्यूआर कोड और रुपे कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। भुगतान की सीमा भी एनपीसीआई द्वारा निर्धारित की जाएगी।
गौरतलब है कि वर्तमान में कार्ड से भुगतान होने पर व्यापारी सेवा प्रदाता बैंक या संस्था को कुल लेनदेन का एक छोटा हिस्सा शुल्क के रूप में देते हैं। संशोधन के संसद से पारित होने के बाद यूपीआई के जरिए बड़े लेनदेन पर भी इसी प्रकार का शुल्क लागू किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय और विस्तृत प्रावधान एनपीसीआई के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट होंगे।




