दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़, सरगना समेत आठ गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ कर सरगना समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 18 अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (ईस्टर्न रेंज) ने अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उसके सरगना समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 अवैध हथियार, 10 अतिरिक्त मैगजीन, पांच जिंदा 9 एमएम कारतूस, एक अन्य जिंदा कारतूस और एक लोहे का हंसिया बरामद किया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मध्य प्रदेश से अवैध हथियार लाकर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में सप्लाई करता था। गिरोह के सदस्य आपसी संपर्क के लिए सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते थे।
स्पेशल सेल की ईस्टर्न रेंज की टीम, जिसमें इंस्पेक्टर राहुल कुमार, इंस्पेक्टर विनीत कुमार तेवतिया और इंस्पेक्टर अजीत कुमार शामिल थे, ने एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 5 जुलाई 2026 को हरिश चंद्र को गिरफ्तार किया। उसके पास से आठ अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और आठ अतिरिक्त मैगजीन बरामद की गईं।
पूछताछ में हरिश चंद्र ने खुलासा किया कि वह अपने भाई भगत सिंह के साथ मध्य प्रदेश से हथियार लाकर गिरोह के सरगना शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी के निर्देश पर उनकी सप्लाई करता था। उसकी निशानदेही पर 7 जुलाई को प्रीतपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से एक देसी पिस्टल, एक जिंदा कारतूस और लोहे का हंसिया बरामद हुआ।
इसके बाद पुलिस ने फरीदाबाद से गिरोह के सरगना शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी को गिरफ्तार किया। उसके किराए के मकान से एक अवैध पिस्टल बरामद हुई। पूछताछ में उसने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से अवैध पिस्टल मंगाकर विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर रहा था। उसने तस्करों, सप्लायरों और डिलीवरी करने वालों का संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा था और पहचान छिपाने के लिए फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, वर्चुअल नंबर तथा एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता था।
शिशपाल की निशानदेही पर कुलदीप सागर को गिरफ्तार किया गया, जिसके घर से एक पिस्टल और दो मैगजीन बरामद हुईं। कुलदीप की सूचना पर अलीगढ़ से आदेश कुमार को पकड़ा गया, जिसकी निशानदेही पर फरार आरोपी गणेश उर्फ लकी के घर से एक पिस्टल बरामद की गई।
पुलिस ने 14 जुलाई को नूर मोहम्मद उर्फ तस्लीम और मोहम्मद शान को भी गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से चार देसी पिस्टल, एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और एक रिवॉल्वर बरामद हुई। 15 जुलाई को विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया गया, जिसकी निशानदेही पर उसके घर से पांच जिंदा 9 एमएम कारतूस बरामद किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का सरगना शिशपाल सिंह मध्य प्रदेश से अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल मंगाता था, जबकि नूर मोहम्मद अलीगढ़ से देसी हथियारों की व्यवस्था करता था। हथियारों को पहले उत्तर प्रदेश के गांवों, बल्लभगढ़ के किराए के मकानों और दिल्ली-एनसीआर के अन्य ठिकानों पर छिपाकर रखा जाता था, जहां से उन्हें विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी मूल रूप से अलीगढ़ का निवासी है और वर्तमान में हरियाणा के बल्लभगढ़ में किराए पर रह रहा था। वह पहले भी वर्ष 2021 में मथुरा में अवैध हथियार तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
पुलिस ने बताया कि नूर मोहम्मद के खिलाफ 12 और मोहम्मद शान के खिलाफ छह आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। वहीं आदेश कुमार और विक्रम सिंह पर अवैध हथियार खरीदकर विभिन्न राज्यों के अपराधियों को बेचने का आरोप है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर संख्या 164/2026 के तहत आर्म्स एक्ट की धारा 25(8), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 61(2) तथा संगठित अपराध सिंडिकेट से संबंधित धारा 111 के तहत मामला दर्ज किया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और अन्य अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।

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