पुलिस ने थाने बुलाकर जूतों से मारा, ब्राह्मणों को गालियां दीं… अखिलेश यादव से बताते हुए रोने लगे सत्यम त्रिवेदी

इंस्पेक्टर पर लगाए गंभीर आरोप

कानपुर/उत्तर प्रदेश। पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला कानपुर का है, जहां सत्यम त्रिवेदी नामक युवक ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि थाने में इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह ने उसे जूतों से बेरहमी से पीटा। इस घटना ने न केवल पुलिस की छवि पर गहरा धब्बा लगाया है, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। सोमवार को सत्यम त्रिवेदी जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले तो अपने ऊपर हुए अत्याचार को बयां करते हुए फफक-फफक कर रो पड़े।
सत्यम ने कहा कि पुलिस से न्याय की उम्मीद की थी, लेकिन इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह ने थाने में बुलाकर उन्हें अपमानित किया और जूतों से पीटा। यहां तक ब्राह्मण समाज को गालियां दीं। रोते हुए सत्यम ने कहा कि क्या यूपी में ब्राह्मण होना अपराध है? पुलिस पर यह आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि थाने वह जगह है, जहां पीड़ित न्याय की उम्मीद लेकर जाता है। अगर वहीं पीड़ितों को प्रताड़ित किया जाएगा, तो आम जनता का पुलिस पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।
यूपी पुलिस की कार्यशैली पर पहले से ही लापरवाही और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन सत्यम त्रिवेदी का मामला इस रवैये की ज्वलंत मिसाल बन गया है। कई मामलों में यह देखा गया है कि पीड़ितों की एफआईआर दर्ज करने में देरी होती है या उन्हें टरकाया जाता है। अब थाने में पिटाई जैसे आरोप पुलिस की जवाबदेही पर और भी गहरे सवाल खड़े कर रहे हैं।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया और कहा कि अगर जनता को न्याय दिलाने वाली संस्था ही अन्याय करने लगेगी, तो प्रदेश में अराजकता का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि सत्यम त्रिवेदी जैसे युवाओं के साथ हुए अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अखिलेश ने कहा कि पुलिस सुधार की बातें केवल कागजों तक सीमित हैं। थानों में आज भी गरीब, पीड़ित और कमजोर वर्ग के लोग न्याय के बजाय अपमान झेलते हैं। सत्यम का मामला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

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