कानपुर सेंट्रल–नौबस्ता मेट्रो ‘अप-लाइन’ पर शुरू हुआ टेस्ट रन, 10 लाख की आबादी को होगा फायदा

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर मेट्रो का कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो टेस्ट रन बुधवार को हुआ। सुबह 11 बजे से यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार के नेतृत्व में मेट्रो अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ट्रेन नौबस्ता के लिए रवाना हुई। यह टेस्ट रन चार घंटे तक चला। इस रूट पर मेट्रो के संचालन के शुरू होने से दस लाख की आबादी को दक्षिण कानपुर से उत्तर कानपुर पहुंचने में आसान होगा। टेस्ट रन के दौरान प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने मेट्रो के अंदर विभिन्न तकनीकी और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। टेस्ट रन में उनके साथ निदेशक (वर्क्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) सीपी सिंह, निदेशक (परिचालन) प्रशांत मिश्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।
प्रबंध निदेशक सुशील कुमार पायलट कोच में प्रवेश कर सबसे पहने ट्रेन के संचालन और तकनीकी प्रणालियों पर अधिकारियों से चर्चा की। जैसे ही मेट्रो पहले स्टेशन झकरकटी पहुंची, प्रबंध निदेशक व सभी अधिकारी मेट्रो से उतर कर स्टेशन के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया और उपलब्ध सुविधाओं की जांच की। इसके बाद इस रूट पर पड़ने वाले सभी स्टेशन पर रूक-रूक की उसकी गहनता से जांच किया। मेट्रो के जनसम्पर्क अधिकारी पंचानन मिश्रा ने बताया कि टेस्ट रन के दौरान मेट्रो ट्रेन को मैनुअल मोड में 5 किमी प्रति घंटा की ‘लो-स्पीड’ पर चलाया गया।
कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक ‘अप-लाइन’ पर ट्रैक, थर्ड रेल सिस्टम, सिग्नलिंग आदि के कार्य पूरे होने के बाद मेट्रो ट्रेन को टेस्ट रन के लिए नौबस्ता तक ले जाया गया। इस दौरान ट्रैक, पावर सप्लाई और इंटरफेसों की जांच की गई। इससे प्राप्त डेटा का विश्लेषण करने के बाद आगे टेस्ट रन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि टेस्ट रन के अगले चरण में टेस्टिंग के दौरान ट्रेन को आटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) और आटोमेटिक ट्रेन आपरेशन (एटीओ) मोड में भी चलाया जाएगा। सिग्नलिंग से संबंधित मैप वेरिफिकेशन टेस्ट किए जाएंगे, जिनके परिणामों के आधार पर सॉफ्टवेयर अपग्रेड किया जाएगा, जिसके बाद ‘हाई-स्पीड’ टेस्ट किए जाएंगे।
प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि टेस्टिंग प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टीमों के निरीक्षण किया जाएगा तथा मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इसे यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में अभी डेढ़ से दो महीने का समय लगेगा।
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