दिल्ली में स्कूल फीस एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम

Cabinet approves school fee act in Delhi, arbitrariness of private schools will be curbed

नई दिल्ली। दिल्ली में स्कूल फीस एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। हालांकि, यह एजेंडा में नहीं था। बताया गया कि मंत्री आशीष सूद टेबल एजेंडा लेकर आए, जिसे मंजूरी दे दी गई। दिल्ली में अभी तक प्राइवेट स्कूलों की फीस निर्धारण और वृद्धि पर अंकुश को लेकर ऐसा अधिनियम कोई नहीं था। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि मुख्यमंत्री ने फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों की परेशानी सुनने के बाद स्कूलों को नोटिस भी जारी किया। लेकिन, फीस वृद्धि के नियमन के लिए कानून की आवश्यकता थी। कैबिनेट ने इसके लिए दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसप्रेंसी इन फिकसेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस-2025 को मंजूरी दी है।
बताया गया कि 65 दिनों में सरकार ने इस बिल को लाकर गुड गवर्नेंस का उदाहरण पेश किया है। इससे 1677 स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों व उनके अभिभावकों को राहत मिलेगी। इससे पहले किसी सरकार ने फीस वृद्धि को नियंत्रित करने पर ध्यान नहीं दिया। 1973 के एक्ट में स्कूलों की मनमानी रोकने का कोई प्रविधान नहीं था।
तीन स्तरीय समिति बनाकर इस बिल को लागू किया जाएगा। पहले स्तर पर स्कूल स्तरीय 10 सदस्यीय फीस रेगुलेशन कमेटी बनेगी, जिसमें स्कूल प्रबंधन के साथ ही पांच अभिभावक भी शामिल होंगे। इसमें अनुसूचित जाति व महिलाएं भी अनिवार्य रूप से होंगी। स्कूल की इमारत व अन्य 18 बिंदुओं पर विचार करने के बाद फीस वृद्धि का निर्णय लेगी। अगले सत्र के लिए 21 जुलाई को यह गठित कर दी जाएगी। 21 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति का निर्णय तीन वर्षों के लिए होगा।
जिला स्तरीय समिति डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन की अध्यक्षता में गठित होगी। यदि स्कूल स्तरीय समिति अपना निर्णय नहीं देगी तो जिला स्तरीय समिति इसे सुनेगी। यदि 45 दिनों में रिपोर्ट नहीं देगी तो राज्य स्तरीय समिति के पास जाएगी। राज्य स्तरीय समिति में सात सदस्य होंगे। यदि स्कूल स्तरीय समिति के निर्णय से स्कूल के 15 प्रतिशत अभिभावक सहमत नहीं हैं तो वह जिला स्तरीय समिति में अपील कर सकते हैं। नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल को एक से दस लाख रुपये तक जुर्माना के साथ ही मान्यता रद करने व मैनेजमेंट को भंग कर इसे सरकार के अधीन लाया जा सकता है। 1973 के एक्ट में फीस नहीं देने पर छात्र को प्रताड़ित करने से रोकने के लिए प्रविधान नहीं था। इस तरह की शिकायत मिलने पर प्रत्येक बच्चा 50 हजार रुपये जुर्माना। यदि 20 दिनों में शिकायत दूर नहीं हुई तो जुर्माना तीन गुणा और उसके बाद मान्यता रद करने का प्रविधान है।

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