ओपन जेल में बंदी मूलाराम और सीमा ने लिए सात फेरे, हाईकोर्ट की अनुमति से संपन्न हुआ अनोखा विवाह

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय निर्णय सुनाते हुए हत्या के अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे दो बंदियों को जेल परिसर में विवाह करने की अनुमति प्रदान की। आज यह विवाह संपन्न हो गया है।

जोधपुर/राजस्थान। जोधपुर जिले की मंडोर स्थित ओपन जेल सोमवार को एक अनोखे और भावनात्मक दृश्य की साक्षी बनी, जब बंदी मूलाराम और सीमा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। यह विवाह राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद विधिवत रूप से संपन्न हुआ, जिसने सुधारात्मक न्याय व्यवस्था के मानवीय और पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण को एक बार फिर उजागर किया।
जेल परिसर को इस अवसर पर पारंपरिक विवाह स्थल की तरह सजाया गया था, जहां सभी धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराया गया। समारोह में दोनों पक्षों के परिवारजन, रिश्तेदार और करीबी लोग शामिल हुए। पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे के साथ जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह के बाद उपस्थित लोगों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मूलाराम और सीमा की मुलाकात ओपन जेल में कार्य के दौरान हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच आपसी समझ, विश्वास और स्नेह का संबंध विकसित हुआ, जिसके बाद उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया। दोनों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए विवाह की अनुमति के लिए आवेदन किया, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद जेल प्रशासन की देखरेख में यह विवाह आयोजित किया गया।
जेल प्रशासन ने भी इस आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया गया कि विवाह समारोह गरिमा और परंपराओं के अनुरूप संपन्न हो। अधिकारियों के अनुसार ओपन जेल की व्यवस्था का उद्देश्य बंदियों को समाज के मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक कदम उठाना है।
यह विवाह केवल दो व्यक्तियों के वैवाहिक बंधन में बंधने का अवसर नहीं था, बल्कि यह सुधारात्मक न्याय प्रणाली के उस मानवीय पहलू को भी दर्शाता है, जिसमें बंदियों को नई शुरुआत का अवसर प्रदान किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की पहल से बंदियों में सकारात्मक परिवर्तन आता है और वे समाज में पुनः सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं।
ओपन जेल की अवधारणा भी इसी सोच पर आधारित है, जहां अच्छे आचरण वाले बंदियों को सीमित स्वतंत्रता के साथ काम करने और सामाजिक जीवन से जुड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे माहौल में संबंधों का निर्माण और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होना स्वाभाविक है।
इस अनोखे विवाह ने यह संदेश दिया है कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में पुनर्स्थापन, मानवीय गरिमा और नई शुरुआत के अवसर प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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