69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में फिर शुरू हुई सुनवाई,अनारक्षित वर्ग ने नौकरी जाने का जताया डर

सुप्रीम कोर्ट में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई, जहां अनारक्षित वर्ग ने नौकरी जाने का डर जताया।

नई दिल्ली/एजेंसी। उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को लंबित अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर देने की बात कही। मामले में बहस बुधवार और गुरुवार को भी जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान अनारक्षित वर्ग की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले का विरोध किया गया। अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि वे पिछले करीब छह वर्षों से नौकरी कर रहे हैं और यदि हाई कोर्ट का आदेश लागू किया गया तो बड़ी संख्या में लोग नौकरी से बाहर हो जाएंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में चयन सूची को रद्द करते हुए राज्य सरकार को मूल चयन सूची में आरक्षण के सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर नए सिरे से चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर रखी हैं।
सुनवाई की शुरुआत में पक्षकारों ने पीठ को बताया कि इससे पहले मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी। उस समय पक्षकारों की सहमति से राज्य सरकार से यह सुझाव मांगा गया था कि क्या मौजूदा नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों को हटाए बिना आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी में समायोजित किया जा सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया था कि यदि ऐसा संभव हुआ तो संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उचित आदेश पारित किया जा सकता है।
कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर बताया था कि वह करीब 9,500 अभ्यर्थियों को समायोजित कर सकती है। राज्य सरकार ने इसके साथ सूची भी प्रस्तुत की थी, जिसमें 4,946 ऐसे अभ्यर्थी शामिल थे जो चयन की मेरिट सूची में थे, लेकिन उन्होंने पूर्व में नियुक्ति का विकल्प नहीं चुना था।
उस समय 4,946 अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किए जाने को लेकर कुछ पक्षकारों और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के नौकरी पाने के अवसर प्रभावित होंगे। मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर उठा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की नए सिरे से सुनवाई की जाएगी और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान बीएड योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को योग्य माने जाने के मुद्दे पर भी बहस हुई। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से जुड़ा मुद्दा भी पीठ के समक्ष उठा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button