देश के लिए 3 जंग लड़ने वाले पूर्व सैनिक से धोखाधड़ी! अपनी ही जमीन बचाने के लिए पड़ा भटकना

देश के लिए 1962, 1965 और 1971 की तीन जंग लड़ने वाले 90 साल के पूर्व सैनिक कैप्टन चुन्नीलाल भू-माफिया के कारण अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जालसाजों ने फर्जी दस्तावेज और डमी व्यक्ति खड़ा कर उपनिवेशन तहसील से उनकी जमीन की रजिस्ट्री करवा ली।

जैसलमेर/राजस्थान। 1962 में चीन और 1965 व 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्धों में देश की सेवा कर चुके 90 वर्षीय पूर्व सैनिक कैप्टन चुन्नीलाल आज अपनी ही जमीन बचाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा निवासी इस वयोवृद्ध सैनिक के साथ जैसलमेर में हुई घटना ने सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित लैंड स्कैम की परतें खोल दी हैं।
कैप्टन चुन्नीलाल को पोंग बांध विस्थापित होने के बाद सरकार की ओर से मोहनगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि आवंटित की गई थी। हिमाचल में निवास होने के कारण वे इस जमीन पर बटाई के जरिए खेती करवाते थे। इसी का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने फर्जीवाड़ा कर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। 16 जून को उपनिवेशन तहसील में एक व्यक्ति को चुन्नीलाल बताकर फर्जी रजिस्ट्री कराई गई और महज छह दिन के भीतर 22 जून को उसका म्यूटेशन भी कर दिया गया। इतनी तेजी से हुई कार्रवाई ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जैसलमेर सैनिक विश्राम गृह के प्रभारी लालाराम के अनुसार, यह गिरोह बाहरी राज्यों में रहने वाले पूर्व सैनिकों को निशाना बना रहा है, जो साल में केवल एक-दो बार ही अपनी जमीन देखने आ पाते हैं। भू-माफियाओं के पास ऐसे लोगों का पूरा डेटा मौजूद है और वे सुनियोजित तरीके से बुजुर्ग व दूरस्थ निवासियों की जमीन हड़प रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के कई मामले अब तक सामने नहीं आ पाए हैं और कई विस्थापित सैनिक अपनी जमीन गंवा चुके हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कैप्टन चुन्नीलाल के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर को फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों के चक्कर लगाने पड़े। बाद में जब मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में पहुंचा, तब कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट की जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज संवेदनशील जानकारी भू-माफियाओं तक कैसे पहुंच रही है। देश की रक्षा करने वाले एक वयोवृद्ध सैनिक के साथ हुई इस घटना से स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

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