‘महिला के बेडरूम में पुलिस का जबरन घुसना निजता का उल्लंघन’, हाई कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

पुलिस द्वारा एक महिला के बेडरूम में जबरन घुसना उसकी निजता का उल्लंघन था, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को पीड़िता को 10 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया।

कांती जाधव/महाराष्ट्र स्टेट हेड

मुंबई/ब्यूरो। बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए पुलिस का किसी महिला के बेडरूम में जबरन प्रवेश करना उसकी निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को नागपुर निवासी 26 वर्षीय पीड़िता को 10 हजार रुपये हर्जाने के रूप में देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की पीठ ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, जिसका उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह पीड़िता को दो माह के भीतर 10 हजार रुपये का भुगतान सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी कहा कि सरकार इस राशि की वसूली संबंधित दोषी पुलिस अधिकारी से कर सकती है, जो महिला की निजता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया जाए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किसी नागरिक के घर में, विशेषकर किसी महिला के बेडरूम में प्रवेश करना और जबरन उसका मोबाइल फोन जब्त करना उसकी गरिमा और निजता पर सीधा आघात है। अदालत ने पुलिस की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह कार्रवाई किसी आपराधिक मामले की जांच के तहत की गई थी।
पीठ ने कहा कि इस प्रकार की दलील विधायिका द्वारा निर्धारित अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन को उचित नहीं ठहरा सकती। जांच एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून के दायरे में रहकर ही कार्य करें और किसी भी स्थिति में गैरकानूनी तलाशी या जब्ती को जांच का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य किसी भी प्रकार से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए और कानून के शासन के तहत ही सभी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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