आर्थिक तंगी के चलते दिल्ली में पिता ने बेटी को सेप्टिक टैंक में डुबोया
मुकुंदपुर, बाहरी दिल्ली में एक पिता ने अपनी 10 माह की बेटी को सेप्टिक टैंक में डुबोकर मार डाला। उसने कबूल किया कि वह दूसरी बेटी का खर्च उठाने में असमर्थ था, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

बाहरी दिल्ली। दूसरी बेटी के जन्म और उसकी परवरिश की चिंता 10 माह की बच्ची की सांसों पर भारी पड़ गई। कल मुकुंदपुर में घर के आंगन में बने सेप्टिक टैंक में अपनी मासूम बेटी को डूबो कर मारने वाले पिता ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि उसकी आर्थिक स्थिति सही नही है और वह दूसरी बेटी का खर्च उठाने में असमर्थ था, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए उसने बच्ची को सेप्टिक टैंक में फेंक दिया। आरोपित 12 वीं पास है और माडल टाउन में एक नामी निजी स्कूल की वैन चलाता था।
रविवार सुबह भलस्वा डेरी थाना पुलिस को 10 माह की बेटी की के अपहरण की पीसीआर काल मिली। बच्ची के पिता दीपक ने पुलिस बताया कि जब वह बिस्कुट खरीदने बाहर गया तो उसकी बेटी अपने बिस्तर से गायब मिली। बाहरी उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेश्वर स्वामी ने बताया कि पूछताछ के दौरान घटना की जो टाइमलाइन दीपक ने पुलिस को बताई, उसमें विरोधाभाष नजर आया।
लोकल सीसीटीवी फुटेज का फ्रेम-बाय-फ्रेम विश्लेषण किया। फुटेज में उसके घर से बाहर जाने की बात साबित नहीं हुई। इसके बाद शक और बढ़ गया, दीपक से कड़ी पूछताछ की, इसके बाद वह टूट गया और उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर बच्ची की लाश उसके घर के सेप्टिक टैंक से बरामद कर ली।
रविवार सुबह दीपक की पत्नी अपनी दोनों बेटियों के साथ चारपाई पर सोई हुई थी। बगल में सोई बेटी गायब हो गई और मां को भनक तक नहीं लगी। पुलिस को शक है कि आरोपित ने पत्नी व पांच वर्षीय बड़ी बेटी को नशीला पदार्थ दिया गया हो। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस एंगल की भी जांच की जा रही है।
नवजात शिशुओं के खिलाफ हो रहे इन अपराधों पर रोकथाम के लिए 11 साल से काम करने वाली संस्था पालोना की संस्थापक मोनिका आर्य का कहना है कि जब शिशु सुरक्षा संबंधी कानूनों को जब तक मजबूत नहीं बनाया जाएगा, इस जघन्य अपराध पर लगाम लगाना असंभव है। नन्हें बच्चे को उनके जन्मदाताओं से बचाया जाए। इसलिए संस्था लगातार इन्फेंट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रही है। सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।



