भारत का ‘गोल्डन पंच’, वर्ल्ड मुक्केबाजी कप फाइनल्स में इंडिया ने 9 स्वर्ण पदकों के साथ रचा इतिहास

स्पोर्ट्स डेस्क/ग्रेटर नोएडा। भारत ने अपने घर पर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स के अंतिम दिन 9 स्वर्ण पदक जीतकर सफलता हासिल की। शहीद विजय सिंह पथिक स्पो‌र्ट्स काम्प्लेक्स में गूंजते हुए दर्शकों के बीच भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कई प्रमुख ओलंपिक श्रेणियों में दबदबा दिखाकर स्वर्णिम लहर चलाई, जबकि पुरुष वर्ग में भी दो स्वर्ण पदकों ने भारत के इस अभियान को और मजबूत किया।
भारत ने कुल मिलाकर नौ स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक जीते। इस बार शामिल हुए सभी 20 भारतीय मुक्केबाजों ने पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। गुरुवार का दिन महिला मुक्केबाजों के नाम रहा। जहां मीनाक्षी (48 किग्रा), प्रीति (54 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) और नूपुर (80+ किग्रा) ने दोपहर सत्र में स्वर्ण जीते।
वहीं, शाम के सत्र में निकहत जरीन (51 किग्रा), जैस्मीन लैंबोरिया (57 किग्रा) और प्रवीन (60 किग्रा) ने भी शीर्ष स्थान हासिल किए। लास एंजेलिस 2028 ओलंपिक में महिला और पुरुष वर्गों की समान भागीदारी लागू होने के साथ इस फाइनल डे पर भारतीय महिलाओं के दमदार प्रदर्शन ने विश्व मुक्केबाजी में भारत की बढ़ती ताकत का मजबूत संकेत दिया।
शाम की सबसे बड़ी जीत विश्व चैंपियन जैस्मीन लैंबोरिया की रही, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक पदक विजेता वू शिह यी को 4-1 से हराकर धमाकेदार खिताब जीता। जैस्मीन ने शुरुआत से ही अपने सहज मूवमेंट और धारदार कांबिनेशन से दबदबा कायम किया और आखिरी चरण में मिले दबाव को संयम से झेलकर मुकाबला अपने नाम किया।
दो बार की वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन ने चीनी ताइपे की गुओ यी शुआन को 5-0 से शिकस्त दी, जिसमें उनकी क्लासिक सटीकता और रिंग नियंत्रण झलकता रहा। प्रवीण ने जापान की आयााका तागुची के खिलाफ 3-2 की कड़ी जीत दर्ज की, जिसमें उनके बेहतरीन काउंटर पंच और श्रेष्ठ मूवमेंट निर्णायक साबित हुए।
दोपहर में मीनाक्षी ने एशियाई चैंपियन फरजोना फोजिलोवा को 5-0 से हराकर भारत के लिए स्वर्ण जीत की शुरुआत की। उनकी गति, सटीकता और कसा हुआ डिफेंस, खासकर पहले राउंड का लेफ्ट-राइट कांबिनेशन से मुकाबले पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद प्रीति ने इटली की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता सिरिन चर्राबी को एकतरफा 5-0 से हराया।
18 महीने बाद रिंग में लौटीं अरुंधति चौधरी ने उज्बेकिस्तान की अजीजा जोकिरोवा को 5-0 से मात दी। नूपुर ने उज्बेकिस्तान की सोतिंबोएवा ओल्तिनोय को 3-2 से पराजित किया और अंतिम राउंड में महत्वपूर्ण पंचों से अपना पहला विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स खिताब सुरक्षित किया।
भारत के पुरुष मुक्केबाजों ने भी दिन को स्वर्णिम बनाते हुए दो स्वर्ण पदक जीते। सचिन (60 किग्रा) ने किर्गिस्तान के मुनरबेक उउलू सेइइतबेक को 5-0 से हराया, जहां उनकी सटीकता, रफ्तार और सफाई से लगाए पंच निर्णायक रहे। सबसे नाटकीय जीत हितेश (70 किग्रा) की रही, जिन्होंने शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद शानदार वापसी की और कजाखस्तान के नुर्बेक मुरसाल को 3-2 से हराया। अंतिम दो राउंड में लगे उनके जोरदार काउंटर मुकाबले का मोड़ साबित हुए।

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