गाजियाबाद में 100 करोड़ के फ्लैट बुकिंग घोटाले में तीन गिरफ्तार, एसआईटी की बड़ी कार्रवाई
एएसआर रियलटेक लिमिटेड और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी की परियोजनाओं में फ्लैट और दुकानों की बुकिंग के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, कूटरचना और गबन का आरोप है।

गाजियाबाद। करीब 100 करोड़ रुपये के फ्लैट और दुकान बुकिंग घोटाले में थाना नंदग्राम पुलिस की एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एएसआर रियलटेक लिमिटेड और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि निवेशकों से जुटाई गई करोड़ों रुपये की रकम आरोपियों के बैंक खातों तक पहुंची थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक टाटा सफारी भी बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ितों की शिकायत पर 28 जून 2026 और 16 जुलाई 2026 को थाना नंदग्राम में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों में एएसआर रियलटेक लिमिटेड और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी की परियोजनाओं में फ्लैट और दुकानों की बुकिंग के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, कूटरचना और गबन के आरोप लगाए गए हैं। बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच में यह तथ्य सामने आया कि निवेशकों से प्राप्त धनराशि गिरफ्तार आरोपियों के खातों में भी स्थानांतरित की गई थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संदीप कुमार (58), प्रवीन कुमार उर्फ पीके गुप्ता (55) और आर्यन गुप्ता (21) शामिल हैं। तीनों गाजियाबाद के थाना सिहानी गेट क्षेत्र स्थित नेहरू नगर के निवासी हैं। संदीप और प्रवीण सगे भाई हैं, जबकि आर्यन, प्रवीण का पुत्र है। पुलिस ने तीनों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से एक टाटा सफारी वाहन बरामद कर जब्त कर लिया है।
यह कार्रवाई एसआईटी प्रभारी निरीक्षक सतराज सिंह के नेतृत्व में थाना नंदग्राम और थाना सिहानी गेट पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। पुलिस का कहना है कि मामले में वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है और घोटाले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जारी है। जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।
गौरतलब है कि इस बहुचर्चित घोटाले में प्रारंभिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी समेत थाना नंदग्राम के 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया था। इसके बाद मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई, जो अब लगातार साक्ष्य जुटाकर आरोपियों तक पहुंच रही है।




