दिल्ली पुलिस की घोर लापरवाही, लड़की के मरने के बाद 25 जून को हुई ‘सेक्सुअल असॉल्ट’ की एफआईआर

महिला मरीज के साथ दूसरे मरीज ने सेक्सुअल असॉल्ट किया

उत्तर पूर्वी दिल्ली। जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में 23 जून को हुए बहुचर्चित ‘सेक्सुअल असॉल्ट’ केस में पुलिस ने लड़की के मरने के बाद 25 जून को ‘मॉलेस्टेशन’ का मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले की जब मीडिया ने गहराई से पड़ताल की तो यह खुलासा हुआ। लड़की की मौत क्यों हुई, इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम के बाद होगा। अभी लड़की की बॉडी जीटीबी अस्पताल की मॉच्र्युरी में रखी गई है। पुलिस परिजनों की तलाश कर रही है। जेपीसी अस्पताल में भर्ती 23 साल की लड़की से ‘रेप’ की खबर आई थी।
उत्तर पूर्वी जिला पुलिस ने अपने मीडिया ग्रुप में शाम 6:17 बजे मेसेज भेजा। पुलिस टीम ने पाया कि अस्पताल में भर्ती महिला मरीज के साथ दूसरे मरीज ने ‘सेक्सुअल असॉल्ट’ किया था, जिसकी पहचान मोहम्मद फैज (23) रूप में हुई। न्यू उस्मानपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अगले दिन यानी 24 जून की रात लड़की की जीटीबी अस्पताल में मौत हो गई।इस तरह से रहा घटनाक्रम
नॉर्थ ईस्ट पुलिस ने 25 जून की रात 9:57 बजे मेसेज भेजा… 23 जून को वॉर्ड से बाहर गई तो छेड़छाड़ की सूचना मिली। लड़की को जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया। मेडिकल में बाहरी चोट नहीं पाए गए। जीटीबी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सेक्सुअल असॉल्ट या मॉलेस्टेशन की सचाई जानने के लिए जब डीसीपी (नॉर्थ ईस्ट) आशीष मिश्रा को कॉल किया गया, जो उन्होंने पिक नहीं किया। पुलिस के इस मामले में लीपापोती करने की वजह से मीडिया ने इस मामले की तह तक जाने के लिए अपने स्तर पर पड़ताल की तो सनसनीखेज खुलासा हुआ।
इस मामले में एफआईआर लड़की के 24 जून की देर रात मरने के बाद 25 जून को की गई। आरोपी मोहम्मद फैज को भी 25 जून को ही अरेस्ट किया था। अब सवाल ये है कि पुलिस ने 23 जून को मीडिया को केस दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी की गलत जानकारी क्यों दी? इस बारे में डीसीपी आशीष मिश्रा और अडिशनल डीसीपी संदीप लांबा से संपर्क किया गया, जिनकी तरफ से अभी जवाब नहीं मिला।

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