पॉकेट गवाह मामले में सख्त कार्रवाई: इस्पेक्टर दिनेश वर्मा तीन साल के लिए डिमोट, एसआई बनाए गए
इंदौर पुलिस कमिश्नर ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा को पॉकेट गवाह केस में डिमोट कर दिया है। साथ ही उन्हें एएसआई बना दिया है। उनके बैच के लोग अब डीएसपी बन चुके हैं।

इंदौर/मध्यप्रदेश। खजराना थाना के पूर्व प्रभारी और वर्तमान में राज्य साइबर सेल में पदस्थ निरीक्षक दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच पूरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निरीक्षक पद से घटाकर उप निरीक्षक (एसआई) बना दिया है। यह दंडात्मक कार्रवाई तीन वर्षों के लिए लागू की गई है।
विभागीय जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया। आदेश के बाद दिनेश वर्मा का पद उनके बैच के अधिकारियों की तुलना में काफी पीछे चला गया है, जबकि उनके साथ भर्ती हुए कई अधिकारी वर्तमान में डीएसपी पद पर पदोन्नत हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में थाना प्रभारी रहे। इसी दौरान दर्ज कई मामलों की जांच में एक ही व्यक्ति को बार-बार गवाह बनाए जाने का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को 742 मामलों में और नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को 504 मामलों में गवाह बनाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 और 2023 के बीच हत्या, धोखाधड़ी, जानलेवा हमला, कूटरचना, छेड़छाड़, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में भी इन्हीं दोनों व्यक्तियों को गवाह बनाया गया। ऐसे करीब 333 प्रकरणों में दोनों के नाम गवाह के रूप में दर्ज पाए गए। इसके अलावा 742 जब्ती पत्रकों पर भी दोनों के हस्ताक्षर मिलने से जांच अधिकारियों को संदेह हुआ।
जांच रिपोर्ट में एक विशेष मामले का उल्लेख करते हुए बताया गया कि अपराध क्रमांक 324 में विवेचक द्वारा गवाह इरशाद और गणेश ठाकुर के फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जिससे आरोपियों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर द्वारा की गई थी, जिन्होंने अपनी गोपनीय रिपोर्ट तत्कालीन डीसीपी को सौंपी थी। इसके आधार पर विभागीय जांच शुरू हुई।
पुलिस कमिश्नर ने अपने आठ पृष्ठों के आदेश में दिनेश वर्मा के कार्यों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और जिम्मेदारी से निर्वहन नहीं किया। आदेश में पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(2), 64(3) और 582 के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है, जिसमें थाना प्रभारी को अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों के लिए भी जिम्मेदार माना गया है।
गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में विभागीय अनुशासन को लेकर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विजय नगर थाने के तत्कालीन टीआई रविंद्र सिंह गुर्जर और निरीक्षक अजय वर्मा को भी डिमोशन कर एसआई बनाया जा चुका है। वहीं, खजराना थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) कमल सिंह गुर्जवार को भी एक शिकायत को लगभग 400 दिनों तक लंबित रखने के मामले में डिमोट किया गया था।
कमल सिंह का नाम पूर्व में भी कई विवादों में सामने आ चुका है, जिनमें आरोपियों पर दबाव बनाकर बयान लेने और पत्रकारों को फर्जी मामलों में फंसाने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



