शारदा प्रतिष्ठान और ग्रेस हार्वेस्ट ने संजान के बाढ़ पीड़ितों को दी राहत, युवाओं के साहस से बची कई जिंदगियां

पालघर-उमरगांव सीमा पर आई भीषण बाढ़ में संजान कॉलोनी के 85 लोगों और 25 मजदूरों को स्थानीय युवाओं ने साहसपूर्वक बचाया। इसके बाद शारदा प्रतिष्ठान और ग्रेस हार्वेस्ट ने बाढ़ पीड़ितों को खाद्यान्न, कंबल, गैस चूल्हा, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री वितरित कर राहत पहुंचाई।

कांती जाधव/महाराष्ट्र स्टेट हेड

पालघर/उमरगांव। 22 जुलाई को पालघर जिला और गुजरात सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश ने संजान क्षेत्र में भयावह बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। विशेष रूप से महाराष्ट्र-उमरगांव सीमा पर स्थित संजान कुष्ठ रोग वसाहत के परिवार इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए। पूरी रात बाढ़ के बढ़ते जलस्तर, बहते हुए सामान और डूबते घरों के बीच लोगों ने भय और असहायता का सामना किया, जहां एक-दूसरे की जान बचाना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई थी।
इस कठिन परिस्थिति में संजान कॉलोनी के युवा लड़के-लड़कियों ने अद्भुत साहस, धैर्य और सामूहिकता का परिचय देते हुए पूरी रात बिना थके राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे। कॉलोनी के स्त्री-पुरुषों के सहयोग से उन्होंने न केवल कॉलोनी के सभी 85 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, बल्कि पास की एक कंपनी में बाढ़ में फंसे 25 मजदूरों को भी जीवनदान दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने रस्सियों, टायर ट्यूब, साड़ियों, बेडशीट, बांस की डंडियों और उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर बचाव अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
बचाव कार्य के दौरान सभी प्रभावित लोगों को उमरगांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में अस्थायी आश्रय प्रदान किया गया। बाढ़ का पानी कम होने और हालात सामान्य होने के बाद जब लोग अपने घरों को लौटे, तो उन्हें भारी नुकसान और उजड़े हुए आशियाने का सामना करना पड़ा।
ऐसी विषम परिस्थितियों में सामाजिक संस्थाओं ने आगे बढ़कर राहत कार्यों की कमान संभाली। कैनोसा कॉन्व्हेंट, तलासरी के सहयोग से शारदा प्रतिष्ठान, मुंबई और ग्रेस हार्वेस्ट, मुंबई द्वारा 4 अगस्त 2026, मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों के लिए व्यापक राहत सामग्री का वितरण किया गया। इस दौरान अन्नधान्य, गैस चूल्हा (शेगड़ी), कंबल, दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं तथा दवाइयां वितरित की गईं, जिससे प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली।
शारदा प्रतिष्ठान के डॉ. सचिन खरातो ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को अधिकतम संभव चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे इस आपदा के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबर सकें। राहत कार्य में कैनोसा कॉन्व्हेंट, तलासरी की सिस्टर शालिनी डिसूजा, ग्रेस हार्वेस्ट के सूर्यनारायण तथा शारदा प्रतिष्ठान के कांति जाधव और मनीष सावंत सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
यह पूरा घटनाक्रम न केवल प्राकृतिक आपदा की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं, एकजुटता और सेवा भावना की मिसाल भी प्रस्तुत करता है। स्थानीय युवाओं का साहस और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग इस आपदा में उम्मीद की किरण बनकर उभरा, जिसने कई जिंदगियों को बचाने और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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