गले में अटका सिक्का तक नहीं निकाल पा रहे,गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल

 

गाजियाबाद। शासन स्तर पर भले ही तमाम दावे किए जाएं, लेकिन संसाधनों के अभाव में जिले के सरकारी अस्पताल रेफरल यूनिट बनकर रह गए हैं। गंभीर बीमारियों के मरीजों के पहुंचने पर उन्हें बिना प्राथमिक उपचार दिए ही रेफर कर दिया जाता है। दो दिन पहले ही एमएमजी अस्पताल में एक 11 साल की बच्ची को लाया गया, जिसके गले में एक सिक्का अटक गया था। उसे तुरंत निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। गंभीर बात यह है कि यहां लोकल एनेस्थीसिया की व्यवस्था भी नहीं है।
शनिवार की दोपहर एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर रूप से घायल पूजा (22) पहुंची थीं। उसका पैर बुरी तरह से कुचला हुआ था। फार्मासिस्ट और वॉर्ड बॉय ने उसे बिना एनेस्थीसिया दिए टांके लगाने शुरू कर दिए। तेज दर्द से पूजा चीखने लगीं। तेज दर्द के कारण उन्हें शॉक सिंड्रोम हो गया और उसकी धड़कन व सांस बंद हो गई। उन्हें तत्काल सीपीआर दिया गया, जिससे किसी तरह जान बच सकी, लेकिन उसके बाद कई घंटे तक उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया और बाद में हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी में यह स्थित केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि एनेस्थीसिया नहीं लगाने के कारण आए दिन इमरजेंसी में इस तरह के हालात बनते हैं।
वहीं इमरजेंसी में पहुंचने वाले 70 प्रतिशत गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। यह केवल एमएमजी का ही नहीं, बल्कि कंबाइंड और महिला अस्पताल में भी इसी तरह के हालत हैं। आईएमए के स्टेट सचिव डॉ. वीबी जिंदल बताते हैं कि कई बार मरीज बहुत ज्यादा सेंसेटिव होता है और उनको लोकल एनेस्थीसिया लगाना चाहिए। अत्यधिक दर्द के कारण कई बार सिनकोप हो हो जाता है, जिससे मरीज की हालत बेहद गंभीर हो जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button