इंदिरापुरम के 2 लाख से अधिक लोगों से होगी 349 करोड़ की वसूली, जीडीए बोर्ड बैठक में फैसला
349 crores will be recovered from more than 2 lakh people of Indirapuram, decision taken in GDA board meeting

गाजियाबाद। गाजियाबाद में वैशाली की तरह ही अब इंदिरापुरम में रहने वाले 2 लाख से अधिक लोगों पर 349 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। जीडीए की बोर्ड बैठक में मंगलवार को इसका फैसला हुआ। मेरठ में मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किसानों को बढ़े हुए मुआवजे देने पर चर्चा की गई। इसके लिए जल्द ही एक कमिटी बनेगी, जो रेट निर्धारण के अलावा वसूली की रणनीति बनाएगी।
इस एरिया में हाईराइज के अलावा जीडीए के फ्लैट बने हैं। यदि बिल्डर सोसायटी चला रहा है तो उसे सीधे नोटिस देकर पैसे की वसूली होगी। आरडब्ल्यूए होगी तो उसे नोटिस दिया जाएगा। आरडब्ल्यूए हर फ्लैट आवंटी से जितना पैसा बनेगा उसे वसूल करके जीडीए में जमा करवाएगी। इसका एक जॉइंट अकाउंट खोला जाएगा। मालूम हो कि जनवरी में वैशाली योजना के आवंटियों पर भी जीडीए ने मुआवजे का 275 करोड़ रुपये का भार डाला था। इसकी वसूली की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है।
जीडीए ने इंदिरापुरम योजना का अधिग्रहण 1988 के आसपास किया था। किसानों को 90 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजा दिया गया। किसानों ने इसके खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया। लोअर कोर्ट से लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। सुप्रीम कोर्ट ने रेट को बढ़ाकर 297 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया। मामला भूमि अर्जन पुनर्वासन प्राधिकरण (लारा कोर्ट) कोर्ट पहुंच गया। वहां से निर्देश के बाद अब जीडीए ने इसके भुगतान करने का फैसला किया।
जीडीए ने जो मुआवजा तय किया उसके दो रेट हैं। सुप्रीम कोर्ट से तय मुआवजे के 6 मामले के 3 लाख 55 हजार 187 वर्ग गज जमीन का रेट ब्याज सहित 2251.21 प्रति गज तय किया गया है। बाकी 166 मामले के 36 लाख 37 हजार 842 वर्ग गज का रेट 740.57 रुपये के हिसाब से तय किया है। जीडीए का तर्क है कि लोअर कोर्ट ने जो मुआवजा 160 रुपये प्रति गज के हिसाब से तय किया है बाकी को उसी के हिसाब से दिया जाए। भविष्य में इसमें बढ़ोतरी होती है तो आवंटियों से वसूली की जाएगी।
यदि किसी का भूखंड 2251 रुपये प्रति गज वाले हिस्से में आता है तो उसे 100 वर्ग गज के भूखंड पर 2 लाख 25 हजार 100 रुपये देना पड़ेगा। यदि 740 रुपये प्रति गज के दायरे में आता है तो उसे 100 वर्ग गज का 74 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। बता दें कि वैशाली में 485 एकड़ और इंदिरापुरम में 1285 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। डिवेलपमेंट चार्ज समेत अन्य खर्च को जोड़ते हुए जीडीए ने यहां पर 695 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि का आवंटन किया था।
बोर्ड ने पहल पोर्टल को लागू कर दिया है। रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक करने हेतु आप अपनी सुविधा अनुसार समय तारीख स्वयं निश्चित कर सकते हैं। समय पर किस्त की जानकारी और डिफॉल्ट पर रिमाइंडर अब हर आवंटी तक पहुंचेगा। आवंटी का ऑनलाइन लेजर होगा। म्यूटेशन की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। आवंटन पत्र खुद डाउनलोड कर सकेंगे। साथ ही हर तरह के करेक्शन भी खुद कर सकेंगे। एनओसी के लिए जीडीए जाने की जरूरत नहीं होगी।
जीडीए हरनंदीपुरम टाउनशिप के लिए पांच गांवों से 336 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण करने के लिए 2,384 करोड़ रुपये खर्च करेगा। साथ ही किसानों को दस फीसदी विकसित भूखंड दिए जाने का भी निर्णय लिया गया। मंगलवार को होने वाली बोर्ड मीटिंग से पहले विकास प्राधिकरण ने जमीन की लागत का अनुमान पेश किया। जिसे बोर्ड से अप्रूवल मिल गया।
जीडीए के सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हरनंदीपुरम के लिए भूमि दरों पर निर्णय लेने के लिए डीएम की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, जो भूमि अधिग्रहण (पुनर्वास और पुनर्स्थापन) अधिनियम, 2013 के अनुसार डीएम सर्किल दरों से चार गुना अधिक है। भूमि अधिग्रहण की अनुमानित लागत 2,384 करोड़ रुपये आंकी गई है। पांच गांव मथुरापुर, शमशेर, चंपतनगर, भनेरा-खुर्द और नंगला फिरोज मोहन नगर की जमीन ली जाएगी।
वहीं, बोर्ड में प्रमोटिंग लीडरशिप एंड एंटरप्राइज फॉर डिवेलपमेंट ऑफ ग्रोथ इंजन्स(पीएलईडीजीई) योजना के तहत गालंद में 0.431 हेक्टेयर भूमि के भूमि उपयोग को कृषि से औद्योगिक में बदलने का प्रस्ताव पास किया गया। मधुबन बापूधाम आवासीय योजना का बोर्ड बैठक में लेआउट संशोधित हो गया। इसमें ग्रुप हाउसिंग के भूखंड को छोटे भूखंड में बदला गया। इसमें किसानों के 700 से अधिक भूखंड मिलने का रास्ता साफ हो गया।



