बाघ और आदमी एक घाट पर पीते हैं पानी! 44 डिग्री गर्मी में रोजाना 500 फीट पहाड़ी चढ़कर बूझाते हैं प्यास

छतरपुर/मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के किशनगढ़ रेंज में स्थित पाठापुर गांव के 100 से अधिक आदिवासी परिवार पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस गांव में न तो हैंडपंप है और न ही बोरवेल, जिसके कारण यहां के लोगों को 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित झरने से पानी लाना पड़ता है। यह झरना बाघ और अन्य जंगली जानवरों का भी पेयजल स्रोत है, जिसके कारण ग्रामीणों को जानवरों से हमले का डर भी रहता है।
40 से 45 डिग्री तापमान में यानी झुलसा देने वाली गर्मी में छतरपुर के पाठापुर गांव के लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। यह कुछ महीन की बात नहीं है बल्की ऐसा संकट साल भर रहता है। गांव से दूर एक झरना है जहां पर पानी रिसता है। पानी का वही एक मात्र स्त्रोत है। गर्मी के मौसम में झरने में पानी कम हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए 2-3 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। महिलाएं सिर पर डिब्बा रखकर 1 किलोमीटर दूर स्थित कुंड से भी पानी भरकर लाती हैं। ग्रामीणों ने कई बार जल संकट के समाधान के लिए सरकार से गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बता दें कि पाठापुर गांव छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा क्षेत्र में आता है। इस भीषण गर्मी में गांव के लोग जान जोखिम में डालकर पहाड़ी के नीचे झरने से पानी भर रहे हैं। ग्रामीणों को रोजाना 4-6 डिब्बा पानी (लगभग 56-84 लीटर) लाने में पूरा दिन लग जाता है। गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण कई बार ग्रामीणों में आपस में झगड़े भी हो जाते हैं।

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