बिहार के पितृपक्ष मेले में रूस-यूक्रेन दुश्मन नहीं, साथ में किया पिंडदान
रूस और यूक्रेन की सेनाएं भले ही 4 साल से जंग लड़ रही हों, लेकिन दोनों देशों के नागरिक बिहार में आते ही दुश्मनी भुला बैठे हैं। उन्होंने अपने पुरखों का एक साथ पिंडदान किया। वहीं 8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीकी श्रद्धालु पितृपक्ष मेले में आ रहे हैं।

गयाजी,बिहार। मोक्षधाम गयाजी में इस वर्ष पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंच रही है। अब तक 37 लाख 50 हजार 200 से अधिक तीर्थयात्री और पिंडदानी गया पहुंचकर पिंडदान व तर्पण कर चुके हैं। रूस, यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्राजील समेत कई देशों के श्रद्धालुओं ने भी यहां अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए।
प्रशासन के अनुसार, 8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से करीब 30 से 40 श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात और ठहरने की व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
मेले के दौरान अब तक 1 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है, जबकि खोया-पाया केंद्र के माध्यम से 852 लोगों की सहायता की गई। मेले से संबंधित शिकायतों के लिए बनाए गए नियंत्रण कक्ष में 1,857 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन पर आवश्यक कार्रवाई की गई।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाई गई टेंट सिटी में अब तक 11,378 लोगों को ठहराया गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए 10,619 रिस्ट बैंड बांटे गए हैं। भाषा की समस्या दूर करने के लिए शुरू की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद सुविधा का भी 84,756 तीर्थयात्री लाभ उठा चुके हैं।
गयाजी में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ा गया है। ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ पहल के तहत पितृवाटिका में अब तक 482 पौधे लगाए गए हैं। वर्ष 2022 में करीब 9.40 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर करीब 34.79 लाख हो गई थी। इस वर्ष अब तक 37.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का पहुंचना गयाजी के बढ़ते धार्मिक पर्यटन का संकेत माना जा रहा है।




