सूचना बोर्ड गायब, घटिया सामग्री से बन रहा हाई स्कूल — लोक निर्माण विभाग के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल
खड़गवां के मझौली ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन हाई स्कूल बना भ्रष्टाचार और लापरवाही का नमूना

शोभित शर्मा,खड़गवां/छत्तीसगढ़। लोक निर्माण विभाग (PWD) जिला एमसीबी द्वारा खड़गवां विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मझौली में हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन यह निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों में घिरता नजर आ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर सबसे बुनियादी नियमों की भी अनदेखी की जा रही है। निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे यह पता ही नहीं चल पा रहा कि कार्य की स्वीकृत लागत क्या है, ठेकेदार कौन है और निर्माण की समय-सीमा क्या निर्धारित है।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।भवन निर्माण में उपयोग की जा रही छड़ (सरिया) किसी भी मान्यता प्राप्त ब्रांड की नहीं है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्माण में डाली जा रही रेत पूरी तरह घटिया और अशुद्ध बताई जा रही है, जिसमें मिट्टी की मात्रा अधिक होने की शिकायत है। अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिससे भविष्य में भवन की टिकाऊपन पर खतरा मंडरा रहा है।
सुरक्षा से खिलवाड़ या भ्रष्टाचार?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवन जैसे सार्वजनिक उपयोग के निर्माण में यदि घटिया सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।मझौली के ग्रामीणों में इस निर्माण को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि,“अगर अभी जांच नहीं हुई, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?”
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए
उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच लैब से कराई जाए
दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
सवाल ?
बिना सूचना बोर्ड के आखिर किसकी अनुमति से चल रहा है निर्माण?
घटिया सामग्री का उपयोग क्यों और किसके संरक्षण में हो रहा है?
क्या विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान हैं या जानबूझकर आंख मूंदे बैठे हैं?
मझौली का यह हाई स्कूल निर्माण कार्य अब सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि प्रणाली की पारदर्शिता और जिम्मेदारी की परीक्षा बन गया है। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भवन आने वाले समय में किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।




