जिला अधिकारी का फरमान हुआ हवा हवाई, फतेहपुर में बिना रजिस्ट्रेशन एवं बिना फायर एनओसी के चल रहे अवैध हॉस्पिटल

सत्येंद्र शुक्ला,(फतेहपुर/उत्तर प्रदेश)। जनपद की जिला अधिकारी सी इंदुमती ने जनपद का कार्य भार संभालने के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ एक बैठक की थी, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि फतेहपुर जनपद में चल रहे अवैध हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, क्लीनिक एवं पैथोलॉजी तथा झोलाछाप डॉक्टरों के ऊपर कानूनी कार्यवाही करते हुए इन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी करेंगे। वहीं उन्होंने यह भी बैठक में दर्शाया की अवैध हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, क्लीनिक एवं पैथोलॉजी तथा झोलाछाप डॉक्टर के यहां मरीज की मृत्यु होने के पश्चात शिकायत मिलने पर 24 घंटे के अंदर कड़ी कार्यवाही करने का काम मुख्य चिकित्सा अधिकारी करेंगे। उनका यह फरमान जनपद में किसी भी दशा पर लागू होता नजर नहीं आ रहा है। शहर से लेकर गांव तक अवैध हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, क्लीनिक एवं पैथोलॉजी तथा झोलाछाप डॉक्टरों की फौज कर रही है मौज मरीज़ व उनके तीमारदारों की जेब में डकैती डालने का काम जनपद के अवैध हॉस्पिटल, नर्सिंग होम क्लीनिक एवं पैथोलॉजी के संचालक तथा झोलाछाप डॉक्टर कर रहे हैं।
ताजा मामला फतेहपुर जिले की तहसील खागा क्षेत्र के नगर पंचायत खखरेरू वार्ड नंबर 2 का है। जहां एक बेहद गरीब परिवार अवैध अस्पताल के शोषण एवं ठगी का शिकार हुआ है। पीड़ित बलवंत सोनकर की पत्नी सुशीला देवी गर्भवती थी। बलवंत सोनकर अनुपस्थिति में अचानक सुशीला देवी को प्रसव पीड़ा हुई तब घर के लोग उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खखरेरू में लेकर गए जहां 16 मार्च 2024 को सुशीला देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चा थोड़ा सा अस्वस्थ था इस पर खखरेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक महिला डॉक्टर ने सुशीला देवी को खखरेरू स्थित एक प्राइवेट आरके मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती करने की सलाह दी। महिला डॉक्टर के कहने पर बलवंत सोनकर ने अपनी पत्नी सुशीला देवी को आरके मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां उससे 5000 रुपए वसूलने के बाद उसे दूसरे बंदना अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। किसी तरह बलवंत सोनकर सुशीला देवी एवं नवजात बच्चे को लेकर सिराथू स्थित वंदना हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां बच्चे का चार दिन तक इलाज करने के बाद 30000 रुपए का बिल बलवंत सोनकर के हाथ में थमा दिया गया। गरीब बलवंत सोनकर ने किसी तरह 24000 रुपए की व्यवस्था कर वंदना हॉस्पिटल में जमा करवाएं। इसके बाद वंदना हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा जल्द से जल्द बच्चे को प्रयागराज ले जाने की सलाह बलवंत सोनकर को दी गई। फिर क्या था बलवंत सोनकर बच्चों को सिराथू स्थित वंदना हॉस्पिटल से लेकर जैसे प्रयागराज के लिए निकले ही थे की बच्चों की रास्ते में ही मृत्यु हो गई। इस तरह गरीब बलवंत सोनकर ने अवैध प्राइवेट अस्पतालों के मकड़जाल में फंस कर रुपए के साथ-साथ बच्चे की जान भी गंवा दी। परेशान होकर पीड़ित बलवंत सोनकर ने थाना खखरेरू में लिखित तहरीर देकर दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आरके मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक द्वारा अपने निजी हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती कर 24 घंटे सेवा दी जाती है। हॉस्पिटल संचालक द्वारा स्वास्थ्य विभाग की नियमावली से विपरीत जाकर डिलीवरी एवं एबॉर्शन का काम किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरके मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक के पास ना तो स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कोई डिग्री है और ना ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन एवं फायर एनओसी की कोई परमिशन ले रखी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खखरेरू की महिला डॉक्टर ने प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करने की सलाह क्यों दी? महिला डॉक्टर बलवंत सोनकर को फतेहपुर जिला अस्पताल में भी रेफर कर सकती थी जहां बच्चों की जान बचाई जा सकती थी एवं इलाज भी निशुल्क किया गया होता। इससे साफ जाहिर होता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खखरेरू के स्वास्थ्य कर्मियों की क्षेत्र के प्राइवेट अस्पतालों से मिली भगत है। अब देखना आया है कि खखरेरू थाना पुलिस एवं फतेहपुर जिले का स्वास्थ्य विभाग दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है? या फिर गरीब बलवंत सोनकर की आवाज भ्रष्टाचार के दलदल में दब कर रह जाएगी।




