‘गोपनीय रिपोर्ट’, जिसमें फेल होने की वजह से दिल्ली पुलिस के कुछ इंस्पेक्टर नहीं बन पाए एसएचओ

नई दिल्ली/एजेंसी। कमिश्नर संजय अरोड़ा के कार्यकाल में दिल्ली पुलिस की सबसे बड़ी फेरबदल को अंतिम रूप दिया जा चुका है। लॉ एंड ऑर्डर की सबसे अहम कड़ी एसएचओ की बहुप्रतीक्षित लिस्ट आ चुकी है। इसके तहत 126 इंस्पेक्टरों को इधर से उधर किया गया है। इनमें से 34 एसएचओ दोबारा से थाना प्रभारी बनने में सफल रहे है, लेकिन 40 एसएचओ रहे इंस्पेक्टर इससे वंचित रह गए। कई तो पहली बार एसएचओ बने थे, जिन्हें एक थाने में दो साल से ज्यादा होने के बाद फिर से मौके का इंतजार था। सूत्रों का कहना है कि एसएचओ रहे इन इंस्पेक्टरों की ‘गोपनीय रिपोर्ट’ ली गई थी, जिसमें ये ‘फेल’ पाए गए। इसलिए इनकी दोबारा ताजपोशी नहीं की गई।
गणतंत्र दिवस के सफल आयोजन के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से संडे को 78 इंस्पेक्टरों के एसएचओ बनाए जाने की लिस्ट जारी की गई। इसमें 9 मेट्रो, दो साइबर, दो आईजीआई एयरपोर्ट और एक रेलवे थाने के प्रभारी हैं। इनके अलावा 64 को लॉ एंड ऑर्डर वाले पुलिस स्टेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह कुछ एसएचओ को लोकल थानों से मेट्रो और साइबर पुलिस स्टेशन भेजा गया है, जबकि कुछ को यहां से लोकल थानों की जिम्मेदारी दी गई है। कुल मिलाकर 78 एसएचओ की लिस्ट में 34 इंस्पेक्टर ऐसे रहे, जिन्हें फिर से थाने का प्रभारी बनाया गया है।
गोपनीय रिपोर्ट में फेल एसएचओ
बहरहाल, 40 इंस्पेक्टर को एसएचओ की सीट से हटाकर साइड लाइन कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि दरअसल हेडक्वॉर्टर लेवल पर जिलों के डीसीपी से समय-समय पर सभी एसएचओ के कामकाज का रिव्यू लिया गया। ये ‘गोपनीय रिपोर्ट’ थी, जिसके आधार पर एसएचओ की लिस्ट तैयार की गई। जिलों के डीसीपी ने जिन एसएचओ की कार्यशैली या विशेषज्ञता को थानों के बजाय दूसरे यूनिट्स के लिए उम्दा बताया, वो दोबारा थाना पाने में विफल रहे। तीन फंक्शनल एसीपी दोबारा एसएचओ लगे, क्योंकि इनकी रिपोर्ट कार्ड बेहतरीन बताई गई थी।
क्या होती है गोपनीय रिपोर्ट
गोपनीय रिपोर्ट एक ऐसी रिपोर्ट होती है जो पुलिस विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों के प्रदर्शन और व्यवहार के बारे में तैयार की जाती है। यह रिपोर्ट आमतौर पर एक पुलिस अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार की जाती है, और इसमें अधिकारी के कार्यकाल के दौरान के प्रदर्शन, कार्यकुशलता, अनुशासन, और व्यवहार के बारे में जानकारी होती है।गोपनीय रिपोर्ट का इस्तेमाल पुलिस विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों के मूल्यांकन और प्रमोशन के लिए किया जाता है। एक पुलिस अधिकारी को एसएचओ बनने के लिए, उसे एक अच्छी गोपनीय रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है।
इंटरव्यू से हुई 44 की ताजपोशी
इस साल जनवरी के पहले हफ्ते में 100 से ज्यादा इंस्पेक्टरों के इंटरव्यू हुए थे। सिलेक्ट कमिटी ने 125 में से 87.5 या उससे ज्यादा नंबर लाने वाले इंस्पेक्टरों की लिस्ट तैयार की थी। इनमें से 44 को एसएचओ बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि एसएचओ बनने की आस लगाए इंस्पेक्टरों को अब आम चुनाव खत्म होने का इंतजार करना होगा। अगला फेरबदल इसके बाद ही होने की उम्मीद है, क्योंकि कुछ एसएचओ का कार्यकाल तब तक दो साल का हो चुका होगा।



