भारत के बाद अब पाकिस्तान में पैदा हुई कॉकरोच जनता पार्टी, शहबाज और मुनीर के खिलाफ खोला मोर्चा
भारत से शुरू हुआ कॉकरोच आंदोलन अब पाकिस्तान पहुंच चुका है। इस देश में सोशल मीडिया पर "कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान" नाम का एक नया ग्रुप सामने आया है। यह ग्रुप खुद को महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ बना हुआ युवाओं का संगठन कह रहा है। हालांकि, इसे कनाडा से ऑपरेट किया जा रहा है।

इस्लामाबाद/एजेंसी। भारत के बाद अब पाकिस्तान में भी ‘कॉकरोच पार्टी’ नाम से एक नए समूह के उभरने की चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान” नाम का एक ग्रुप सामने आया है, जो भ्रष्टाचार, खराब गवर्नेंस और देश की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के खिलाफ आवाज उठा रहा है। इस घटनाक्रम से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की राजनीतिक चिंताएं बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
ग्रुप का दावा है कि उसका मुख्य एजेंडा आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना, ऊर्जा संकट का समाधान करना और देश में बढ़ती पानी की कमी को दूर करना है। इससे पहले भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शनों के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था और सरकार पेपर लीक को लेकर सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ के 1.12 लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। यह समूह “पाकिस्तान इसके लोगों का है, भ्रष्ट माफियाओं का नहीं” जैसे नारों के साथ युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह अकाउंट मई माह में बनाया गया था और कथित रूप से कनाडा से संचालित किया जा रहा है। हाल ही में इस अकाउंट को वेरिफिकेशन भी प्राप्त हुआ है। समूह ने सलमान तरार को अपना चेयरमैन घोषित किया है।
यह संगठन अपने ढांचे को विस्तार देने के लिए विभिन्न पदों पर आवेदन भी आमंत्रित कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि यह समूह अपनी ऑनलाइन मौजूदगी को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में पाकिस्तान या विदेश में इस नाम से एक संगठित संरचना खड़ी की जा सकती है।
अपने घोषणापत्र में समूह ने दावा किया है कि वह आम पाकिस्तानियों, विशेषकर युवाओं की आवाज है, जो भ्रष्टाचार, परिवारवाद और विशेषाधिकार आधारित व्यवस्था से परेशान हैं। संगठन ने पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक सुधारों को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और ऊर्जा संकट के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही है।
हालांकि सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद, इस आंदोलन की वास्तविक जनस्वीकृति, संगठनात्मक मजबूती और इसे एक प्रभावी राजनीतिक शक्ति में बदलने की क्षमता को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
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