वाराणसी के गांव ने तेरहवीं भोज करने वालों को दिया संदेश

वाराणसी,(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के हरहुआ विकास खंड के वाजिदपुर गांव के लोगों ने समाज को संदेश दिया है। इस गांव में अब किसी भी व्यक्ति के निधन हो जाने पर तेरहवीं भोज नहीं होगा। तेरहवीं करने में खर्च होने वाले रुपये से पौधारोपण के साथ गांव के गरीब छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाएगा। सामूहिक रूप से यह फैसला गांव के लोगों ने पंचायत भवन में आयोजित सभा में लिया। सभा बुलाने की पहल गांव के प्रधान और प्रधान संघ के अध्यक्ष लालमन यादव ने की। सभा में कहा गया कि किसी परिवार में निधन हो जाने पर परिवार के लोग पहले से ही दुखी रहते हैं। इसके बाद तेरहवीं भोज करने के लिए परिवारीजनों को काफी परेशान होना पड़ता है। इसे करने के लिए गरीब परिवारों को कर्ज तक लेना पड़ता है। ऐसे में गांव में तेरहवीं भोज का आयोजन नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों के इस फैसले को सराहा जा रहा है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसके पास लोग अपनी इच्छानुसार तेरहवीं में होने वाले खर्च को जमा करेंगे। मृत व्यक्ति के तेरहवीं के दिन गांव के पंचायत भवन पर लोग एकजुट होंगे और शोक सभा की जाएगी। शोक सभा के बाद मृतक के जितने बेटे रहेंगे उतने ही फलदार पौधे बेटों के हाथों से गांव में सार्वजनिक भूमि या मृतक की भूमि में लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी बेटों की होगी। इस तरह माता-पिता के निधन के बाद उनकी निशानी के रूप में पौधों को याद किया जाएगा। इसके बाद बची धनराशि को गरीब छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में खर्च किया जाएगा। इसके अलावा यदि किसी गरीब की बेटी की शादी में समस्या आ रही तो उसकी मदद की जाएगी।



