विश्व विख्यात गीता प्रेस के ट्रस्टी और समाज सेवक बैजनाथ अग्रवाल का हुआ निधन

गोरखपुर/उत्तर। प्रदेश के गोरखपुर में स्थित गीताप्रेस के ट्रस्टी और समाजसेवी बैजनाथ अग्रवाल का आज सुबह हरिओम नगर स्थित उनके आवास पर 90 साल की उम्र में निधन हो गया। यह जानकारी उनके पुत्र देवी दयाल अग्रवाल ने दी। सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृत आत्मा के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतृप्त परिवार को सांत्वना दी है। धार्मिक पुस्तकों के लिए विश्व विख्यात गीताप्रेस के ट्रस्टी और समाजसेवी रहे बैजनाथ अग्रवाल का आज तड़के 2.30 बजे हरिओम नगर स्थित उनके आवास पर 90 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया।
लोगों को जैसे इसकी जानकारी हुई शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए लोग उनके आवास पर पहुंच रहे हैं। उनके निधन की सूचना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंची। उन्होंने उनके बेटे और वर्तमान में गीताप्रेस के ट्रस्टी दीनदयाल अग्रवाल से फोन पर बातचीत की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए मृत आत्मा के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बैजनाथ जी एक मृदुभाषी समाजसेवी थे।
साल 1933 में जन्मे हरियाणा के भिवानी के मूल निवासी बैजनाथ अग्रवाल ने महज 17 साल की उम्र में सन 1950 मैं गीताप्रेस के एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर अपने कार्य की शुरुआत की थी। धर्म के प्रति आगाध आस्था और संस्कृति को बढ़ावा देने की उनकी ललक को देखते हुए 1983 में उन्हें गीता प्रेस का ट्रस्टी बनाया गया। तब से लेकर 80 वर्ष की उम्र तक उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां का बखूबी निर्वहन किया है, इस दौरान गीता प्रेस में प्रकाशित पुस्तकों से लेकर नई-नई तकनीकियों के इस्तेमाल सहित विभिन्न भाषाओं में पुस्तकों के प्रकाशन के संदर्भ में लिए गए उनके कई निर्णयों ने आज गीता प्रेस की ख्याति को और ऊपर ले जाने का कार्य किया है।
इस दौरान वह एक प्रबुद्ध समाजसेवी के रूप में भी जाने गए, एक वक्त गीता प्रेस में कर्मचारियों के बीच उत्पन्न हुए असंतोष के दौरान उन पर कई गंभीर आरोप भी लगे थे, लेकिन विचलित हुए बगैर उन्होंने सारी स्थितियों,परिस्थितियों का सामना किया और कर्मचारियों को समझाते हुए फिर से गीता प्रेस को अपनी राह पर वापस ले आए थे। कालांतर में बढ़ती उम्र और अस्वस्थ होने के बाद यह जिम्मेदारी उनके पुत्र दीनदयाल अग्रवाल को सौंप दी गई जो वर्तमान समय में ट्रस्टी के तौर पर गीता प्रेस के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
गीता प्रेस के मैनेजर लालमणि तिवारी कहते हैं कि बैजनाथ अग्रवाल जी ने अपने जीवन के 70 वर्ष से ज्यादा का समय गीता प्रेस और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। इस दौरान वह पूरी तरह गीता प्रेस के एक सच्चे कर्मचारी और ट्रस्टी के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने कभी भी इससे अलग होकर कुछ और करने की कोशिश नहीं की। अपना पूरा जीवन गीता प्रेस और इसके उत्थान के लिए ही समर्पित कर दिया।उन्होंने कहा कि आज का दिन प्रेस के लिए बड़े शोक का दिन है1950 में गीता प्रेस से जुड़ने के बाद से उन्होंने रातों दिन और अपने जीवन काल के अंतिम समय तक सिर्फ गीता प्रेस और उसके उत्थान के विषय में ही सोचा।
29 अप्रैल 1955 में जब देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद यहां स्थापित लीला चित्र मंदिर का उद्घाटन करने आए थे तब भी उन्होंने उनके साथ मंच साझा किया था और अब जब गीता प्रेस के स्थापना दिवस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 4 जून 2022 को आयोजित उद्घाटन समारोह के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और 7 जुलाई 2023 को समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मंच साझा किया था। लालमणि तिवारी ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार काशी में किया जाएगा।

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