23 हजार बहनों के ‘भैया’ मनीष मिश्रा पर उठे सवाल, हवन के दौरान कुर्सी पर बैठने को लेकर विवाद
धार्मिक आयोजन की सामने आई तस्वीर में 23 हजार बहनों के भाई बताए जाने वाले मनीष मिश्रा हवन के दौरान कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि पंडित और अन्य लोग जमीन पर बैठे हैं। तस्वीर को लेकर धार्मिक मर्यादा, परंपराओं और सार्वजनिक आचरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों ने उनसे स्पष्टीकरण की मांग की है, हालांकि तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका पक्ष सामने आना जरूरी है।

बस्ती/उत्तर प्रदेश। सामाजिक सेवा और धार्मिक आयोजनों से जुड़े मनीष मिश्रा को लेकर एक धार्मिक आयोजन की तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं। तस्वीर में मनीष मिश्रा हवन के दौरान कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि उनके साथ मौजूद पंडित और अन्य लोग जमीन पर बैठकर धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इस तरह कुर्सी पर बैठना परंपराओं के अनुरूप है।
मनीष मिश्रा स्वयं को 23 हजार बहनों का भाई बताते हैं और सामाजिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहते हैं। ऐसे में उनके धार्मिक आयोजन में इस तरह बैठने की तस्वीर ने सोशल मीडिया और लोगों के बीच बहस को जन्म दिया है। आलोचकों का कहना है कि जो व्यक्ति बड़ी संख्या में महिलाओं को बहन का दर्जा देकर सामाजिक जिम्मेदारी और संस्कारों की बात करता है, उससे धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने की अपेक्षा स्वाभाविक है।
सामने आई तस्वीर में हवन कुंड के समीप मनीष मिश्रा कुर्सी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि धार्मिक अनुष्ठान करा रहे पंडित और अन्य लोग जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। तस्वीर को लेकर सवाल उठाने वालों का कहना है कि सनातन परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बैठने की निर्धारित पद्धतियों और मर्यादाओं का महत्व माना जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के कुर्सी पर बैठने को लेकर धार्मिक नियमों की व्याख्या आयोजन की प्रकृति और स्थानीय परंपरा के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
मामले को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति समाज में धार्मिक आस्था, संस्कार और परंपराओं की बात करता है तो उसके सार्वजनिक आचरण में भी उन्हीं मूल्यों की झलक दिखाई देनी चाहिए। आलोचकों ने इसे दिखावे और वास्तविक आचरण के बीच अंतर का मामला बताते हुए जवाबदेही की मांग की है।
मनीष मिश्रा की सामाजिक गतिविधियों और उनके द्वारा किए जाने वाले धार्मिक आयोजनों को लेकर समर्थक जहां उन्हें सामाजिक सेवा से जोड़कर देखते हैं, वहीं आलोचक अब सामने आई तस्वीर के आधार पर उनसे स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा से जुड़े होते हैं, इसलिए उनमें मर्यादा और समान व्यवहार का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में फिलहाल मनीष मिश्रा की ओर से तस्वीर को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में तस्वीर के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हालांकि, तस्वीर ने धार्मिक आयोजनों में आचरण, परंपराओं के पालन और सार्वजनिक जीवन में कथनी-करनी के बीच सामंजस्य को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।
लोगों का कहना है कि सामाजिक सेवा और धार्मिक आस्था का उद्देश्य समाज में विश्वास, मर्यादा और सद्भाव को मजबूत करना होना चाहिए। इसलिए धार्मिक आयोजनों में किसी भी प्रकार के भेदभाव, दिखावे या मर्यादा के उल्लंघन से बचना सभी की जिम्मेदारी है।




