रक्षाबंधन पर बहनों से राखी बंधवाने 43 किलोमीटर दौड़कर पहुंचे एसएसबी कोच दीपक सिंह, भाई के स्नेह ने जीत लिया दिल
आजमगढ़ जिले में सशस्त्र सीमा बल में दिल्ली में कोच के पद पर तैनात 40 साल के पहलवान दीपक सिंह ने रक्षाबंधन पर अपनी दो बहनों को ऐसी सरप्राइज दी, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भुला पाएंगी। दीपक ने 43 किलोमीटर बिना रुके दौड़ लगाई।

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। देश की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल के जांबाज जवान और कुश्ती कोच दीपक सिंह ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने परिवार ही नहीं, बल्कि गांव और आसपास के लोगों को भी भावुक कर दिया। दिल्ली में सशस्त्र सीमा बल में कोच के पद पर तैनात 40 वर्षीय दीपक सिंह ने अपनी दो बहनों से राखी बंधवाने के लिए करीब 43 किलोमीटर की दूरी दौड़कर तय की। खास बात यह रही कि उन्होंने इस लंबी दौड़ के लिए कोई विशेष पूर्व तैयारी नहीं की थी।
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के मोहब्बतपुर गांव निवासी दीपक सिंह रक्षाबंधन पर छुट्टी लेकर अपने पैतृक गांव पहुंचे थे। करीब दस वर्ष के अंतराल के बाद उन्हें अपनी बहनों से राखी बंधवाने का अवसर मिला था। उन्होंने इस बार रक्षाबंधन को अपनी बहनों के लिए यादगार बनाने का फैसला किया और वाहन से जाने के बजाय दोनों बहनों के घर तक दौड़कर पहुंचने का संकल्प लिया।
दीपक सिंह ने रात करीब एक बजे मोहब्बतपुर स्थित अपने पैतृक गांव से दौड़ शुरू की। उनके साथ उनके पहलवान मित्र अश्वनी सिंह, राजन यादव और दुर्गेश यादव भी बाइक से चल रहे थे। रात के अंधेरे में दीपक की सुरक्षा और हौसला बनाए रखने के लिए दोस्त अपनी बाइकों की हेडलाइट जलाकर उनके आगे-पीछे चलते रहे। इस तरह उन्होंने पूरी यात्रा के दौरान दीपक के लिए सुरक्षा घेरा बनाए रखा।
दीपक लगातार दौड़ते हुए करीब पौने तीन घंटे में कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पासीपुर गांव पहुंचे। सुबह करीब 3 बजकर 45 मिनट पर वह अपनी छोटी बहन अन्नू सिंह के घर पहुंचे। यहां बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी। कुछ देर रुकने के बाद दीपक ने अपनी यात्रा जारी रखी और अतरौलिया थाना क्षेत्र के बांसगांव स्थित अपनी बड़ी बहन नीलम सिंह के घर की ओर दौड़ पड़े।
सुबह करीब 5 बजकर 30 मिनट पर दीपक अपनी बड़ी बहन नीलम सिंह के दरवाजे पर पहुंचे। रात के अंधेरे से लेकर सुबह की पहली किरण तक करीब 43 किलोमीटर दौड़ने के बाद जब उन्होंने बहन के सामने अपनी कलाई आगे की तो भावुक दृश्य बन गया। दोनों बहनों ने भाई के इस असाधारण प्रयास को देखकर भावुक होकर उसे गले लगा लिया। परिवार के लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
दीपक की यह दौड़ इसलिए भी खास रही क्योंकि 43 किलोमीटर की दूरी आधिकारिक फुल मैराथन की 42.195 किलोमीटर दूरी से भी अधिक है। लंबी दूरी की दौड़ के लिए आमतौर पर धावक लंबे समय तक अभ्यास करते हैं, लेकिन दीपक ने बिना किसी विशेष पूर्व तैयारी के भाई-बहन के रिश्ते और अपनी फिटनेस के भरोसे यह दूरी पूरी कर दी।
दीपक सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 वर्ष की उम्र में जुलाई 2007 में सशस्त्र सीमा बल में सेवा शुरू की थी। बचपन से ही पहलवानी और कुश्ती में रुचि होने के कारण उन्होंने बल की खेल गतिविधियों को अपना क्षेत्र बनाया। समय के साथ कुश्ती के प्रति उनका जुड़ाव और मजबूत होता गया। उन्होंने कुश्ती में बेहतर प्रदर्शन के लिए डीजी मेडल भी प्राप्त किया।
दीपक वर्तमान में सशस्त्र सीमा बल की कुश्ती टीम के कोच हैं और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करते हैं। उनके प्रशिक्षण से तैयार खिलाड़ी देश के लिए खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। उनके एक खिलाड़ी ने चीन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक भी हासिल किया है।
दीपक ने बताया कि करीब दस साल बाद रक्षाबंधन पर उन्हें बहनों से राखी बंधवाने का अवसर मिला। वह पहले से ही चाहते थे कि इस बार ऐसा कुछ किया जाए, जिसे उनकी बहनें लंबे समय तक याद रखें। इसी सोच के चलते उन्होंने बहनों के घर दौड़कर जाने का निर्णय लिया। उनके मुताबिक, बहनों के प्रति स्नेह और इस खास अवसर को यादगार बनाने की इच्छा ने उन्हें लगातार दौड़ते रहने की प्रेरणा दी।
देश की सेवा के साथ खिलाड़ियों को तराशने में जुटे दीपक सिंह का कहना है कि उनकी इच्छा है कि वह हमेशा फिट रहें और देश के लिए नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करते रहें। रक्षाबंधन के मौके पर 43 किलोमीटर की उनकी यह दौड़ भाई-बहन के रिश्ते के प्रति समर्पण, पारिवारिक भावनाओं और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल बन गई है। उनकी इस पहल को युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है।




