नेपाल की बाढ़ में चट्टान की तरह खड़ा रहा ये घर, दुनिया हैरान

नेपाल में आई भयानक बाढ़ और मलबे के सैलाब के बीच एक मंजिला मकान अपनी मजबूत इंजीनियरिंग और ठोस बनावट के कारण सुरक्षित खड़ा रहा। इसने दुनिया का ध्यान खींचा है।

काठमांडू/एजेंसी। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और अचानक आए सैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। तेज बहाव में कई पुल और इमारतें क्षतिग्रस्त होकर बह गईं, लेकिन चीन और तिब्बत सीमा से सटे क्षेत्र में फिरोजी रंग का एक मकान बाढ़ के बीच भी मजबूती से खड़ा रहा। चारों ओर तबाही के बावजूद मकान के सुरक्षित बच जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह घर दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। लोग यह जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या था, जिसने इस मकान को तेज पानी और मलबे के बहाव के बावजूद ढहने से बचा लिया।
विशेषज्ञों के प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक किसी भवन को बाढ़ और मलबे के तेज बहाव जैसी परिस्थितियों में मजबूती प्रदान करने में उसकी नींव और ढांचे की संरचनात्मक गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि भवन की नींव पर्याप्त गहराई तक बनाई गई हो और उसके स्तंभ मजबूत तरीके से जमीन से जुड़े हों तो वह तेज बहाव से उत्पन्न पार्श्व बलों को बेहतर तरीके से सहन कर सकता है।
भवन की मजबूती में बीम और स्तंभों के बीच मजबूत जुड़ाव भी अहम माना जाता है। मजबूत प्रबलित कंक्रीट के स्तंभ और बीम-कॉलम के मजबूत जोड़ मिलकर ऐसा ढांचा तैयार करते हैं, जिसे मोमेंट-रेजिस्टिंग फ्रेम कहा जाता है। यह ढांचा पानी, मलबे और अन्य बाहरी दबाव से उत्पन्न पार्श्व बलों का प्रतिरोध करने में मदद करता है। यही कारण है कि गहरी नींव, मजबूत स्तंभ और बीम के बीच संरचनात्मक निरंतरता किसी भवन की स्थिरता को बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मलबे और कीचड़ के तेज बहाव से किसी भवन पर केवल पानी का दबाव नहीं पड़ता, बल्कि भारी पत्थर, लकड़ी और अन्य मलबा भी उससे टकराता है। ऐसी स्थिति में नींव की गहरी एंकरिंग भवन को अपनी जगह पर बनाए रखने में मदद करती है। पाइल आधारित नींव होने की स्थिति में जमीन के भीतर उसकी पार्श्व प्रतिरोध क्षमता और मजबूत परत में एंड-बेयरिंग भवन को स्थिरता प्रदान कर सकती है। हालांकि किसी विशेष मकान के सुरक्षित बचने की वास्तविक वजह निर्धारित करने के लिए उसकी नींव, निर्माण सामग्री, स्थल की मिट्टी और पूरे ढांचे की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
जानकारों के अनुसार भवन निर्माण के दौरान संबंधित संरचनात्मक मानकों का पालन किया जाना भी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में प्रबलित कंक्रीट संरचनाओं के लिए आईएस 456 जैसे मानकों और नेपाल में लागू राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप डिजाइन तैयार किया जाता है। इसके अलावा डिजाइन से पहले भू-तकनीकी जांच के आधार पर जमीन की क्षमता, मिट्टी की प्रकृति और संभावित प्राकृतिक जोखिमों का आकलन किया जाना चाहिए।
नेपाल में सुरक्षित बचे इस मकान को लेकर सामने आ रहे तकनीकी विश्लेषण का निष्कर्ष यही है कि इसकी मजबूत नींव, प्रबलित कंक्रीट के स्तंभ, बीम और उनके बीच मजबूत जुड़ाव ने भवन को संरचनात्मक स्थिरता प्रदान की होगी। यदि नींव और ऊपरी ढांचा एक मजबूत और निरंतर संरचना के रूप में काम कर रहे हों तो तेज पानी और मलबे से पैदा होने वाले दबाव को पूरे ढांचे में वितरित किया जा सकता है। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर किसी भवन की इंजीनियरिंग क्षमता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस बीच नेपाल में आई फ्लैश फ्लड से तबाही का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। रविवार तक बाढ़ में मरने वालों की संख्या 734 पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के अनुसार राहत और बचाव अभियान में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ तथा पुलों और भवनों को नुकसान पहुंचा। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चलाना भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बाढ़ का असर नेपाल के साथ तिब्बत में भी देखने को मिला है। तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 546 लोग लापता बताए गए हैं। लापता लोगों में विभिन्न देशों के नागरिक भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों का अभी पता नहीं चल सका है, जिनमें 49 भारतीय और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल बताए गए हैं।
नेपाल और तिब्बत में राहत एवं बचाव एजेंसियां बड़े पैमाने पर खोज अभियान चला रही हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने जहां हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और उसके प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ाई है, वहीं बाढ़ के बीच सुरक्षित बचे फिरोजी रंग के मकान ने भवन निर्माण की गुणवत्ता, मजबूत नींव और आपदा-रोधी इंजीनियरिंग के महत्व पर भी नई चर्चा छेड़ दी है।

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