बालोद में आदिवासी समाज का उग्र प्रदर्शन, कलेक्टोरेट में घुसकर पाटेश्वर धाम पर की कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सर्व आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने कलेक्टोरेट का घेराव किया, बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए। वे जामड़ी पाटेश्वर धाम पर कार्रवाई और 'वनवासी' शब्द के इस्तेमाल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।

बालोद/छत्तीसगढ़। बालोद जिले में सोमवार को उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए, जब जामड़ी पाटेश्वर धाम के विरोध और विभिन्न मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के हजारों लोग कलेक्टोरेट घेराव के लिए बालोद पहुंचे। जिले के तुएगोंदी, जामड़ी और आसपास के गांवों से पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों का विशाल जनसैलाब प्रशासन की तमाम तैयारियों पर भारी पड़ गया।
भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों के बावजूद प्रदर्शनकारी कलेक्टोरेट पहुंच गए और बैरिकेड्स तोड़ते हुए परिसर में प्रवेश कर गए। कलेक्टोरेट पहुंचने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए थे। जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति निर्मित हो गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त बल बुलाया, वहीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से पानी की तेज धार छोड़कर भी भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं रुके और हजारों की संख्या में लोग कलेक्टोरेट परिसर में घुस गए।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्टोरेट के मुख्य गेट को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में लोग परिसर के भीतर पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। प्रशासन और पुलिस बल आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने में काफी देर तक मशक्कत करते रहे। आंदोलन इतना व्यापक था कि कलेक्टोरेट परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह प्रदर्शनकारियों से भर गया।
आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रदर्शनकारी पूरे दिन परिसर में डटे रहे। कुछ लोगों ने वहीं लकड़ी का चूल्हा बनाकर पोहा तैयार किया और सामूहिक रूप से भोजन भी किया। इससे साफ संकेत मिला कि आदिवासी समाज अपनी मांगों को लेकर इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है। सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि जामड़ी स्थित पाटेश्वर धाम का निर्माण ग्रामीणों की जमीन पर किया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का लाभ भी धाम परिसर में पहुंचाया जा रहा है, जबकि मूल ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हैं। आदिवासी समाज का यह भी आरोप है कि उनके पारंपरिक धार्मिक स्थल और आस्था के केंद्र ‘पाट’ (पहाड़) पर भी कब्जा कर लिया गया है। समाज के अनुसार यह स्थान उनके देवी-देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए वे जामड़ी पाटेश्वर धाम और उससे जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने वाले मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी कारण समाज ने जामड़ी पाटेश्वर धाम और बाबा बालक दास के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और अधिकारों का मामला है।
आंदोलन के दौरान सर्व आदिवासी समाज ने जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ‘आदिवासी’ शब्द के स्थान पर ‘वनवासी’ शब्द के उपयोग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। समाज का कहना है कि आदिवासी समुदाय देश के मूल निवासी हैं और उनकी पहचान को बदलने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। समाज के नेताओं ने कहा कि उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे आदिवासी अस्मिता और सम्मान का मुद्दा बताया।
घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन ने बताया कि सर्व आदिवासी समाज की ओर से सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। प्रशासन का कहना है कि मांगपत्र में शामिल सभी बिंदुओं का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों से रिपोर्ट प्राप्त कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वही अपर कलेक्टर ने सीके कौशिक ने शाम 6 बजे समाज के 15 प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठकर बातचीत की और उनकी भावनाओं ख्याल रखते हुए एसडीएम में सभी निर्माण एजेंसियों को पत्र लिख कार्यो को तत्काल रोक लगाने आदेशित किया। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। समाज ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि जामड़ी पाटेश्वर धाम से जुड़े विवाद और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।
जिले का सबसे बड़ा जनआंदोलन बना प्रदर्शन
हजारों लोगों की भागीदारी, बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्टोरेट पहुंचने और प्रशासन के सामने अपनी ताकत दिखाने के कारण यह आंदोलन जिले के हाल के वर्षों के सबसे बड़े जनआंदोलनों में शामिल हो गया है। अब पूरे जिले की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले 15 दिन यह तय करेंगे कि यह विवाद शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।




