खाकी शर्मसार? दिल्ली क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों पर एनकाउंटर का डर दिखाकर 5 लाख की रंगदारी मांगने का आरोप
दिल्ली क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों पर रंगदारी मांगने का आरोप लगा है। अमित नागर की पत्नी निलोफर खान ने एसआई रवि राणा और हेड कॉन्स्टेबल योगेंद्र डागर के खिलाफ शिकायत की है। आरोप है कि परिवार को मुकदमे और एनकाउंटर का डर दिखाकर पैसे मांगे गए। मामले की अंदरूनी जांच जारी है।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड
दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली में अपराध और पुलिस के कथित गठजोड़ से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक समय पुलिसकर्मियों का करीबी बताए जा रहे रोहिणी निवासी अमित नागर के परिवार ने क्राइम ब्रांच के दो पुलिसकर्मियों पर रंगदारी मांगने और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अमित नागर की पत्नी नीलोफर खान उर्फ सिम्मी की ओर से उपराज्यपाल, पुलिस आयुक्त और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई शिकायत में क्राइम ब्रांच की उत्तरी रेंज-दो टीम में तैनात उपनिरीक्षक रवि राणा और हेड कांस्टेबल योगेंद्र डागर पर दस लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगाया गया है। मामले की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमित नागर का रोहिणी की एक नामी सोसाइटी में लंबे समय तक प्रभाव रहा है। बताया जाता है कि वह करीब चार वर्ष तक सोसाइटी में प्रधानी से जुड़ी भूमिका में रहा और इस दौरान रोहिणी, बाहरी उत्तर जिले तथा पूर्वी जिले के कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से उसके करीबी संबंध थे। आरोप यह भी लगाए जाते रहे हैं कि सोसाइटी स्थित उसके कार्यालय में पुलिसकर्मियों की नियमित आवाजाही रहती थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों का कहना है कि अमित नागर पर पुराने आपराधिक मामलों में पुलिस की नजर थी। आरोप है कि पहले उसके साथ कथित रूप से करीबी संबंध रखने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे फोन कर बुलाया और मामूली कार्रवाई अथवा सामान्य गिरफ्तारी के जरिए मामला निपटाने का भरोसा दिया। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव और मामले में बरामदगी दिखाए जाने की आवश्यकता के चलते परिस्थितियां बदल गईं। इसी दौरान क्राइम ब्रांच की दूसरी टीम की ओर से अमित नागर के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई।
परिवार की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई के बीच अमित नागर के परिवार को मुकदमे में फंसाने तथा मुठभेड़ का डर दिखाकर दस लाख रुपये की मांग की गई। नीलोफर खान का दावा है कि बाद में कथित तौर पर पांच लाख रुपये में मामला निपटाने की बात कही गई। शिकायत के अनुसार, यह रकम ढाई-ढाई लाख रुपये की दो किश्तों में क्राइम ब्रांच कार्यालय और रोहिणी के एक होटल के पास दी गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों की कथित वसूली की मांग उस समय भी जारी रही, जब परिवार की मासूम बच्ची अस्पताल में उपचाराधीन थी। नीलोफर का आरोप है कि बच्ची के इलाज के दौरान भी उनसे रकम को लेकर संपर्क किया गया। इन गंभीर आरोपों के बाद उन्होंने मामले की शिकायत दिल्ली के उपराज्यपाल, पुलिस आयुक्त और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से की है।
मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि शिकायत में पुलिस कार्रवाई, कथित वसूली और अपराधियों से पुलिसकर्मियों के संबंधों से जुड़े कई आरोप लगाए गए हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह न केवल संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि पुलिस कार्रवाई के दौरान आपराधिक नेटवर्क और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच संभावित सांठगांठ की भी जांच का आधार बन सकता है।
अमित नागर के अधिवक्ता संजय शर्मा ने कहा है कि मामले में कथित घटनाओं से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए अदालत का रुख किया जाएगा। अधिवक्ता के मुताबिक, क्राइम ब्रांच कार्यालय, उसके सामने स्थित बैंक, बच्ची के उपचार वाले अस्पताल, क्राउन प्लाजा होटल के समीप पार्किंग और उस अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी, जहां अमित नागर का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था।
अधिवक्ता ने पुलिसकर्मियों से जुड़े कथित संपर्कों की जांच के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल विवरण अभिलेख, वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली संबंधी आंकड़े और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाने की बात भी कही है। उनका दावा है कि संबंधित बातचीत मुख्य रूप से व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से हुई थी, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मामले की जांच में अहम हो सकते हैं।
फिलहाल पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी अभी विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। लेकिन पुलिसकर्मियों पर कथित रंगदारी मांगने, धमकी देने और आपराधिक मामलों में समझौते के नाम पर रकम वसूलने के आरोपों ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




