भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना केस,विशेषज्ञों ने बताया—घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

नेशनल डेस्क। देश के कुछ हिस्सों में कोविड-19 के मामलों में फिर से हलचल देखी जा रही है। आंध्र प्रदेश में संक्रमण के चलते दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति 2020 या 2021 जैसी गंभीर नहीं है और लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल कोविड के मामलों में वृद्धि स्थानीय स्तर पर देखी जा रही है, न कि पूरे देश में। आंध्र प्रदेश में सामने आए मामलों के बाद राज्य सरकार ने सर्विलांस, टेस्टिंग और अस्पतालों में तैयारियां बढ़ा दी हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के वाराणसी और महाराष्ट्र में भी कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन कुल संख्या अभी भी सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि SARS-CoV-2 वायरस अब पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह एंडेमिक संक्रमण बन चुका है, जो समय-समय पर सामने आता रहेगा। अशोका यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिस्ट और डीन डॉ. अनुराग अग्रवाल के अनुसार, वायरस कभी गया ही नहीं, लेकिन वर्तमान आंकड़े किसी बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर संकेत नहीं करते।
डॉक्टरों के मुताबिक, मौसम में बदलाव, बढ़ती यात्राएं और नए वैरिएंट का उभरना मामलों में हल्की वृद्धि के कारण हो सकते हैं। हालांकि इसे किसी नई लहर की शुरुआत नहीं माना जा रहा है। अधिकांश लोगों में वैक्सीनेशन और पूर्व संक्रमण के कारण प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है, जिससे गंभीर बीमारी का खतरा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यकता पड़ने पर मास्क पहनने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और खांसी-जुकाम होने पर बुजुर्गों व गंभीर मरीजों से दूरी रखने की सलाह दी गई है। सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने को कहा गया है।
बूस्टर डोज को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभी भी गंभीर बीमारी से बचाव में कारगर है और उच्च जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह लेकर इसे लेने पर विचार करना चाहिए।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिससे लॉकडाउन या कड़े प्रतिबंधों की आवश्यकता पड़े। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत है और निगरानी प्रणाली भी बेहतर हो चुकी है।



