बाड़मेर में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान दिखा रूह कंपा देने वाला नजारा
बाड़मेर में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान रूह कंपा देने वाला नजारा दिखा। अपने आशियाने को बचाने के लिए एक परिवार की मासूम बेटियां अपनी जान दांव पर लगाकर कमरे की छत पर चढ़ गईं।

बाड़मेर/राजस्थान। जिले में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बीच एक मार्मिक और भावुक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया। बाड़मेर ग्रामीण पंचायत क्षेत्र में एक बेबस परिवार का वीडियो सामने आया है, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई के दौरान आंसू, ममता और बेबसी की दर्दनाक तस्वीर देखने को मिली।
जिला मुख्यालय पर जब प्रशासन की जेसीबी मशीनें सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए आगे बढ़ीं, तो वहां किसी तरह का हिंसक विरोध नहीं हुआ। इसके बजाय एक परिवार की बेबसी और अपने आशियाने को बचाने की जद्दोजहद ने सभी को भावुक कर दिया।
बताया जा रहा है कि प्रभावित परिवार में कोई कमाने वाला पुरुष नहीं है। परिवार की मुखिया महिला ने दावा किया कि वह अपनी बेटियों के साथ किसी तरह जीवन यापन कर रही है। जैसे ही जेसीबी मशीनें कच्चे-पक्के कमरों की ओर बढ़ीं, परिवार की दो-तीन मासूम बेटियां दौड़कर अपने कच्चे घर की छत पर चढ़ गईं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने छोटे से घर को बचाने की आखिरी कोशिश थी। लड़कियों की इस मूक अपील को देखकर मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी भी कुछ देर के लिए ठिठक गए। नीचे खड़े पुलिसकर्मी और अन्य लोग लगातार उन्हें नीचे उतरने के लिए समझाते रहे, लेकिन बेटियां रोते हुए बार-बार यही गुहार लगाती रहीं—“हमारा घर मत तोड़ो।”
इसी दौरान पास की झोपड़ी को बचाने के प्रयास में एक अन्य युवती सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ गई। वह बार-बार अपनी झोपड़ी में घुसने की कोशिश करती रही, ताकि प्रशासन को कार्रवाई रोकने पर मजबूर किया जा सके। पुलिसकर्मियों द्वारा उसे बाहर खींचने पर उसकी चीख-पुकार ने माहौल को और भी भावुक कर दिया।
घटनास्थल पर मौजूद एक बुजुर्ग महिला का दर्द भी सबके सामने आ गया, जब उसका घर भी बुलडोजर की चपेट में आ गया। रोते हुए उसने कहा कि उसके परिवार में कोई कमाने वाला पुरुष नहीं है और वह अपनी बेटियों के साथ वर्षों से इसी आशियाने में रह रही थी। “हमारे पास सिर छुपाने के लिए अपनी जमीन नहीं है। 40 साल से यहां रह रहे थे, दो साल पहले मेहनत से यह घर बनाया था, अब सब खत्म हो गया। अब इस तपती धूप में कहां जाएं?”—उसकी यह पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे।
अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के दौरान बाड़मेर ग्रामीण तहसीलदार हुकुमचंद और सरपंच प्रतिनिधि खेराजराम प्रजापत के बीच तीखी बहस भी हुई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जाए, लेकिन प्रशासन ने इसे सरकारी आदेश और न्यायालय के निर्देशों के तहत अनिवार्य कार्रवाई बताया।
सूर्यास्त तक प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी कर ली। जमीन भले ही अतिक्रमण मुक्त हो गई, लेकिन वहां बिखरा मलबा एक परिवार के टूटे सपनों, एक मां की बेबसी और अपने घर को बचाने के लिए संघर्ष करती बेटियों की सिसकियों की गवाही देता रहा।




