पप्पू यादव के अलग-अलग रूप चर्चा में, राजनीति से सामाजिक गतिविधियों तक सक्रियता पर नजर
दिल्ली के मंडी हाउस में जब सैकड़ों साधु-संत जुटे थे, तब पप्पू यादव भी अचानक वहां पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने संतों के समर्थन में नारे लगाए।

पटना/एजेंसी। बिहार की राजनीति में जन अधिकार पार्टी के नेता और पूर्व सांसद पप्पू यादव अपने अलग-अलग अंदाज और गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल के दिनों में उनके विभिन्न सार्वजनिक प्रदर्शनों, बयानों और सामाजिक भागीदारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
दिल्ली के मंडी हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पप्पू यादव साधु-संतों के समर्थन में पहुंचे, जहां उन्होंने उनके साथ प्रदर्शन में भाग लिया और नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस द्वारा भीड़ हटाने के निर्देश के बीच वे प्रदर्शनकारियों के साथ सड़क पर बैठते और विरोध दर्ज कराते नजर आए।
इसके अलावा हाल ही में लोकसभा परिसर में उनका एक अलग रूप देखने को मिला, जब वे गेरुआ वस्त्र धारण कर प्रतीकात्मक प्रदर्शन करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने दान पात्र के माध्यम से विरोध जताने की कोशिश की, जिसे लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ संत संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए आपत्ति भी दर्ज कराई।
पप्पू यादव स्वयं को आनंदमार्ग से जुड़ा बताते रहे हैं। उनका परिवार भी इस सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन से जुड़ा रहा है। उन्होंने कई अवसरों पर सार्वजनिक रूप से समाज सेवा, मानवता और समानता के मूल्यों पर जोर दिया है।
कोरोना महामारी के दौरान भी पप्पू यादव की सक्रियता चर्चा में रही थी। उस समय वे मरीजों को अस्पतालों में बेड दिलाने, ऑक्सीजन और दवाइयों की व्यवस्था कराने तथा जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने के कार्यों में जुटे रहे। इस दौरान लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव का यह बहुआयामी सार्वजनिक जीवन उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग पहचान देता है, जहां वे समय-समय पर विभिन्न रूपों में सक्रिय नजर आते हैं।




