कानपुर में फर्जी मार्कशीट-डिग्री गिरोह का एक और नेटवर्क ध्वस्त, सरगना समेत चार गिरफ्तार
कानपुर में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। गिरोह का सरगना लंदन से भी इस नेटवर्क को चलाता था, जबकि कुछ सदस्य केवल पांचवीं पास थे।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाकर बेचने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कानपुर पुलिस ने सोमवार रात एक और बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। डीसीपी सेंट्रल की सर्विलांस टीम और बेकनगंज थाना पुलिस ने हीरामन का पुरवा स्थित एक मकान में छापेमारी कर गिरोह के सरगना समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह पिछले करीब 13 वर्षों से फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार कर रहा था।
पुलिस के अनुसार गिरोह का सरगना विदेशों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था। उसके पास यूके का पासपोर्ट और वीजा भी बरामद हुआ है। वह पहले दो बार लंदन जाकर वहां एक डिपार्टमेंटल स्टोर में काम कर चुका है और वहीं से उसने अपना नेटवर्क बढ़ाया। गिरोह लंदन, कनाडा, सऊदी अरब, दुबई सहित भारत के कई राज्यों में फर्जी दस्तावेजों की सप्लाई करता था। आरोपित ग्राहकों को मार्कशीट और डिग्री की पीडीएफ व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते थे और बाद में उसकी हार्ड कॉपी निजी कूरियर से पहुंचाते थे।
जांच में सामने आया है कि गिरोह के खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। सरगना लंदन के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर सौदे करता था। पुलिस के अनुसार वर्ष 2016 में एसटीएफ ने उसे हैदराबाद से इसी तरह के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि इससे पहले 18 फरवरी को जूही गौशाला स्थित एक संस्थान से फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ था, जिसमें कई आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके पास से देश के विभिन्न राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों की 1030 फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद की गई थीं। इसके बाद एसआईटी ने गिरोह से जुड़े कई अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
हाल ही में बैंक खातों की जांच के दौरान हीरामन का पुरवा निवासी हसन आसिफ और आमिर अहमद के खातों में संदिग्ध लेनदेन का पता चला। पूछताछ में आमिर ने खुलासा किया कि वह जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ के संपर्क में था, जो इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाते हुए योजना बनाकर सोमवार रात छापेमारी की और जियाउल, हसन और नूरद्दीन को रंगेहाथ दबोच लिया। आरोपित मौके पर कंप्यूटर और लैपटॉप के जरिए फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करते हुए पाए गए।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी जियाउल हसन ने बीबीए के बाद ग्राफिक्स डिजाइन का कोर्स किया था और वह विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रारूप तैयार कर फर्जी दस्तावेजों को असली जैसा बनाने के लिए थ्रीडी मोनोग्राम और होलोग्राम तैयार करता था। गिरोह में अन्य सदस्य अलग-अलग स्तर की मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करने का काम करते थे। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।




