कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य को दिए अहम निर्देश

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन करने तथा कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

कान्हा टाइगर रिजर्व में बीमार बाघ का इलाज करते वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

भोपाल/एजेंसी। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौतों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि बाघों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत निर्धारित सभी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
हाईकोर्ट की जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की रोकथाम के लिए प्रभावी निवारक एवं उपचारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में मौजूद कुत्तों को क्वारंटीन करने तथा आवश्यक जैव-सुरक्षा उपाय लागू करने को भी कहा है।
अदालत ने सरकारों से आदेशों के पालन की स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है।
यह याचिका मुंबई निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल, रोग निगरानी प्रणाली, पशु चिकित्सा सेवाओं तथा जैव-सुरक्षा उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने बाघों की सुरक्षा और रोग नियंत्रण के लिए तय दिशानिर्देशों के कड़ाई से पालन की मांग की है।
याचिका के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल के महीनों में बाघों की मौतों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। अप्रैल माह में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार अर्ध-वयस्क शावकों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद मई में युवा नर बाघ महावीर की भी मौत हो गई। इन घटनाओं के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की आशंका जताई गई है। इसके अतिरिक्त दो अन्य वयस्क नर बाघ भी मृत पाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि एक महीने के भीतर आठ बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, राज्य सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक तथा कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्लभ रॉयल बंगाल टाइगर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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