मानसून में देरी से मुंबई में गहराया जल संकट, झीलों का जलस्तर 12.49 प्रतिशत पर सिमटा
मुंबई में मानसून में देरी और प्री-मानसून बारिश न होने से जल संकट गहरा गया है। झीलों में केवल 12.49% पानी बचा है, जबकि ऊपरी वैतरणा जलाशय सूख गया है।

मुंबई/एजेंसी। मानसून में देरी और प्री-मानसून बारिश न होने के कारण मुंबई में जल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्थिति यह है कि शहर की सात प्रमुख झीलों का जलस्तर घटकर उनकी कुल क्षमता का मात्र 12.49 प्रतिशत रह गया है, जबकि ऊपरी वैतरणा जलाशय पूरी तरह सूख चुका है।
मौसम विभाग के पूर्व वैज्ञानिक के.एस. होसालिकर ने अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए आगे और कठिन परिस्थितियां आने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि मानसून में देरी और सीमित प्री-मानसून वर्षा के चलते शहर को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और नागरिकों से तत्काल आक्रामक जल संरक्षण रणनीति अपनाने की अपील की है।
उन्होंने यह भी कहा कि मानसून के दौरान और उसके बाद पानी के उपयोग के लिए सख्त और ठोस योजना बनाना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाले समय में पानी की कमी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। होसालिकर ने अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) द्वारा अल नीनो की स्थिति बनने की पुष्टि का भी हवाला दिया, जिससे देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।
इस बीच मुंबई में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। सुबह के समय भी तापमान अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही है।
बीएमसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सात जलाशयों में कुल जल भंडार 1,80,756 मिलियन लीटर है, जबकि उनकी कुल क्षमता 14,47,363 मिलियन लीटर है। हालांकि यह स्तर वर्ष 2025 और 2024 के मुकाबले थोड़ा बेहतर है, लेकिन आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
मुंबई शहर की जल आपूर्ति ठाणे, पालघर और नासिक जिलों में स्थित सात प्रमुख बाहरी जलाशयों पर निर्भर करती है। इनमें मोदक सागर, तांसा, मध्य वैतरणा, भाटसा, विहार और तुलसी जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है, जबकि ऊपरी वैतरणा जलाशय पूरी तरह सूख चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में देरी के कारण जलाशयों में पानी भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। कमजोर या विलंबित मानसून आने वाले समय में शहर के जल संसाधनों पर भारी दबाव डाल सकता है।




