ओम पर्वत से गायब हुआ ‘ऊं’, सिर्फ दिख रहा काला पहाड़
'Om' disappeared from Om Parvat, only black mountain is visible

देहरादून/एजेंसी। बर्फ से लकदक रहने वाला ओम पर्वत अचानक बर्फ विहीन हो गया है। करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही ओम की आकृति भी गायब हो गई। देखने के लिए बचा है तो सिर्फ काला पहाड़। ओम पर्वत की ऐसी हालत देखकर स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक और वैज्ञानिक भी हैरान हैं। ओम पर्वत से बर्फ पिघलने की वजह हिमालय पर लगातार बढ़ता तापमान है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में विश्व प्रसिद्ध ओम पर्वत से बर्फ पूरी तरह से पिघल गई है। बर्फ पिघलने के कारण ॐ की आकृति भी पूरी तरह से गायब हो गई है और सिर्फ काला पहाड़ नजर आ रहा है। ओम पर्वत सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिथौरागढ़ में ओम पर्वत के दर्शन करने के बाद यहां पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है।
इस सीजन में गर्मी अधिक होने की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई तो वहीं हिमालयी क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बढ़ने के कारण वातावरण में भी बदलाव आया। जिसका सीधा असर ओम पर्वत पर भी दिखाई दिया। ओम पर्वत चीन सीमा से लगे लिपुलेख दर्रे के पास है। इसकी ॐ आकृति के कारण ही यह पर्वत ओम पर्वत के नाम से पहचाना जाता है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि ओम पर्वत पर बनने वाली आकृति इस बार गायब हो गई है।
ओम पर्वत पर इस साल ओम ओम की आकृति नहीं दिखाई दी। जिसके पीछे वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग इसकी सबसे बड़ी वजह है। ओम पर्वत पर पर्यटन काफी बढ़ गया है। पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए यहां सड़कों का निर्माण भी हो रहा है और कई तरह की सुविधा देने के लिए भी कार्य हो रहा है। जिसके चलते निर्माण कार्यों का सीधा असर हिमालय क्षेत्र पर पड़ रहा है। पर्यावरण पर भी इसका विपरीत प्रभाव दिखाई दे रहा है।
स्कंद पुराण के मानस खंड में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा को कैलाश मानसरोवर यात्रा जितना सार्थक माना जाता है। यही कारण है कि ओम पर्वत को छोटा कैलाश भी कहा जाता है। समुद्र तल से ओम पर्वत की ऊंचाई 6,191 मीटर है। इस पर्वत की विशेषता है कि जब इस पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है तो ॐ की आकृति अलग ही चमकती है। वह पल बेहद ही अद्भुत और अलग ही अनुभूति वाला होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बर्फ कम होने के बावजूद ओम पर्वत की आकृति कभी भी नहीं मिटी।
ऐसा पहली बार हुआ है कि ओम पर्वत की पूरी बर्फ पिघल गई और आज ओम की आकृति भी गायब हो गई। उनका मानना है कि वर्ष 2019 में ओम पर्वत तक सड़क बनाई गई। जिसके बाद से लगभग 100 गाड़ियां रोज ओम पर्वत तक जा रही है। जिसकी वजह से कार्बन बढ़ रहा है और इसका सीधा असर पहाड़ों के वातावरण पर पड़ रहा है। इसके साथ कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने हेलीकॉप्टर दर्शन सेवा भी शुरू करवा दी है। हेलीकॉप्टर ओम पर्वत पर ही उतर रहे हैं। जिसकी वजह से हिमालय क्षेत्र में प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
इसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने आंदोलन भी किया था । स्थानीय लोगों की मांग थी कि हेलीकॉप्टर को आदि कैलाश और ओम पर्वत तक ना ले जाया जाए। ओम पर्वत से 16 किलोमीटर पहले गूंजी में हेलीकॉप्टर रोक दिया जाता तो इससे पर्यावरण भी बचता और लोगों को रोजगार का अवसर भी मिल सकता था।




