महाराष्ट्र में महिलाओं को ऑनलाइन आपत्तिजनक सामाग्री भेजी या प्रस्ताव तो होगी जेल, शक्ति बिल में संशोधन

मुंबई ब्यूरो। महाराष्ट्र विधान परिषद में सर्वसम्मति से भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया। इसके तहत महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन यौन अपराध रोकने के लिए दो प्रावधानों में बदलाव वाले एक विधेयक को विधानमंडल में मंजूरी दी गई। इसके अलावा विधानमंडल द्वारा मंजूर किए गए दो निजी कौशल विश्वविद्यालयों में 60% सीटें स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित की गई हैं। जानकारी के अनुसार, अब डिजिटल, सोशल मीडिया, ईमेल, मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल प्लैटफॉर्म सहित आधुनिक तकनीक माध्यम से किसी महिला को सेक्सुअल प्रपोज़ल देना या आपत्तिजनक सामग्री भेजना अपराध माना जाएगा।
नए कानून के तहत महिलाओं को ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री भेजने के लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान कियागया है। इसके अलावा एसिड अटैक पीड़िता का नाम सार्वजनिक रूप से बताया या प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। उसकी पहचान सुरक्षित रहेगी।
शक्ति विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा ने 2020 में किया था पारित
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में कहा कि शक्ति विधेयक राज्य विधानसभा द्वारा 2020 में पारित किया गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने बाद में इसे वापस भेज दिया था। फडणवीस गृह विभाग के प्रमुख भी हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को सूचित किया गया था कि केंद्र सरकार तत्कालीन भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों को मिलाकर एक समान कानून बना रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) जुलाई 2024 में लागू हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या महाराष्ट्र के संबंध में बीएनएस में संशोधन अब भी आवश्यक हैं। फडणवीस ने बताया कि एक समिति का गठन यह आकलन करने के लिए किया गया था कि प्रस्तावित शक्ति कानून के सभी प्रावधान, जिनमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है, बीएनएस में शामिल किए गए हैं या नहीं।
महाराष्ट्र ने संशोधन करके ये प्रावधान जोड़े
सीएम ने बताया कि समिति के सुझाव के बाद भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 में दो प्रावधान जोड़े गए हैं। फडणवीस ने कहा कि इनमें से एक प्रावधान तेजाब हमले की पीड़िताओं के नामों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने बताया कि इस संशोधन के तहत ईमेल और सोशल मीडिया मंच पर यौन उत्पीड़न को भी अपराध घोषित किया गया है, जिसके लिए तीन साल की कैद व जुर्माना हो सकता है। 60% सीटें स्थानीय विद्यार्थियों के लिए विधानमंडल द्वारा मंजूर किए गए दो निजी कौशल विश्वविद्यालयों में 60% सीटें स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित की गई हैं। इसकेतहत लातूर में फीनिक्स फाउंडेशन द्वारा संचालित पाशा स्किल टेक यूनिवर्सिटी तथा पुणे में फ्रेंड्स यूनियन फॉर एनर्जाइजिंग लाइव्स (FUEL) संस्था की फ्यूल स्किल टेक एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी को मंजूरी दी है।

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