कानपुर में पुलिस ने ऑनलाइन आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का किया भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

कानपुर में पुलिस ने ऑनलाइन आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें 3.91 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। किदवई नगर से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि जबलपुर के सरगना ‘प्रोफेसर’ की तलाश जारी है।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। आइपीएल में टीमों की हार-जीत पर सट्टा खिलवाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने बुधवार को पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। दो आरोपितों को गोविंदपुरी पुल के नीचे और तीन को किदवई नगर स्थित किराये के एक मकान से पकड़ा गया। इनके पास से 3.91 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं। आरोपितों ने रुपये गिनने के लिए तीन और असली व नकली नोटों की पहचान के लिए एक मशीन लगा रखी थी।
गिरोह में गुजरात के तीन कर्मचारी भी थे, जो रकम हारने व जीतने वाले के पास रुपये लेने जाते थे। सरगना जबलपुर निवासी मनीष उर्फ प्रोफेसर की तलाश की जा रही है। हालांकि, पुलिस को उसकी लोकेशन पुणे की मिली है। पुलिस गिरोह के साइबर नेटवर्क की भी जांच कर रही है। वहीं, आरोपितों से बरामद रुपयों को लेकर आयकर विभाग से पत्राचार किया गया है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, बर्रा में 10 दिन पकड़े गए आठ सट्टेबाजों से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस की टीमों ने बुधवार को गोविंदपुरी पुल के नीचे छापेमारी की। यहां एक कार में बैठे दो सट्टेबाजों को पकड़ा गया। इनकी पहचान फजलगंज के बंबा रोड व वर्तमान में मसवानपुर निवासी राजकुमार और कौशलपुरी निवासी कार्तिक लखवानी के रूप में हुई। इनकी निशानदेही पर पुलिस टीम ने किदवई नगर में एक किराये के मकान में पहुंची तो वहां सट्टेबाजी का पूरा सेटअप मिला।
यहां से तीन आरोपितों को पकड़ा गया। इनकी पहचान गुजरात के मेहसाणा उंजा निवासी कल्पेश, रवि नाई और गुजरात के ही पाटन निवासी विष्णु के रूप में हुई। इनके पास से बरामद छह मोबाइल फोन में bethub24.com नाम के एप की आइडी, विभिन्न वेबसाइट, वाट्सएप चैट और रुपयों के लेनदेन का विवरण मिला। गत्ते में रुपये भरे हुए थे और नोटों को गिनने के लिए तीन बड़ी मशीनें भी लगाई गई थीं।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड मनीष उर्फ प्रोफेसर है, जिसके पास मास्टर आइडी है। विभिन्न शहरों में आइपीएल सट्टा खिलाने के लिए उसने अपने गुर्गों को सब-आइडी दे रखी है। गिरोह के सदस्यों ने कई अलग-अलग शहरों में अपना जाल फैला रखा था। पुलिस आयुक्त ने गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली पुलिस टीम को 50 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।
पैकेजिंग कारोबारी कार्तिक है कानपुर का मुख्य आरोपित
कौशलपुरी निवासी कार्तिक सट्टेबाजी के इस खेल में कानपुर का मुख्य आरोपित है। उसकी मिठाई में प्रयोग किए जाने वाले बटर रैपर (पेपर) की फैक्ट्री है। वह लगभग दो साल से सट्टेबाजी कर रहा था। गिरोह के सरगना मनीष उर्फ प्रोफेसर ने उसे अपनी सब-आइडी दे रखी थी। बाद में कार्तिक ने अपनी आइडी शहर में 10 अलग-अलग लोगों को बांट दी थी, जो लोगों का पैसे सट्टे में लगाते थे।
गुजरात के तीन आरोपितों कल्पेश, रवि और विष्णु पर सट्टा जीतने या हारने वालों से नकद रुपये लेने व पहुंचाने का जिम्मा था। इसके लिए उन्हें 15 से 25 हजार रुपये तक वेतन के रूप में मिलता था। पकड़े गए आरोपितों ने बताया कि एक लाख रुपये तक जीती रकम को मास्टरमाइंड मनीष के करंट बैंक अकाउंट में आनलाइन ट्रांसफर किया जाता था। इससे बड़ी रकम को नकद हायर सेंटर पहुंचाया जाता था। पुलिस को अब इन हायर सेंटरों की तलाश है।

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