18 हजार की नौकरी, करोड़ों की लाइफस्टाइल! आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में धान खरीदी पर बड़ा सवाल”

शोभित शर्मा,एमसीबी/छत्तीसगढ़। आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटरों की आय और उनके रहन-सहन के बीच का अंतर अब गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। जहां एक ओर इन ऑपरेटरों को महज लगभग 18 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है, वहीं दूसरी ओर उनके पास आलीशान मकान, महंगी गाड़ियां, और सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इतना ही नहीं, उनके बच्चे नामी-गिरामी निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी कम आय में इतना उच्च जीवन स्तर कैसे संभव हो रहा है?
धान खरीदी में गड़बड़ी का संदेह
सूत्रों के अनुसार, समितियों में होने वाली धान खरीदी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर और समिति प्रबंधक (मैनेजर) की मिलीभगत से फर्जी एंट्री, वजन में हेरफेर, और भुगतान में गड़बड़ी जैसे खेल खेले जा रहे हैं।यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह सिर्फ छोटे स्तर का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
ऑपरेटर मालामाल, तो मैनेजर की कमाई कितनी?
जब कम्प्यूटर ऑपरेटर, जिनकी आधिकारिक आय बेहद सीमित है, इतनी संपत्ति के मालिक बनते दिख रहे हैं, तो यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि समिति के मैनेजर और उच्च स्तर के जिम्मेदार लोगों की कमाई कितनी होगी।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने कभी इन कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करने की जरूरत महसूस की है? या फिर यह सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी नजरअंदाज किया जा रहा है?
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की
निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सकता है।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
संबंधित कम्प्यूटर ऑपरेटरों और मैनेजरों की संपत्ति की जांच
धान खरीदी के रिकॉर्ड की ऑडिट
फर्जी एंट्री और भुगतान की जांच
दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई
यदि समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि किसानों के अधिकारों के साथ भी बड़ा अन्याय होगा।

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