बीजेपी सरकार बनते ही विधानसभा में भी लौटेंगी पुरानी व्यवस्थाएं

As soon as BJP government is formed, the old system will return in the Vidhan Sabha

नई दिल्ली। नई भाजपा सरकार के कार्यकाल में दिल्ली विधानसभा की व्यवस्था में भी बहुत से बदलाव दिखाई देंगे। सभी कार्य नियमानुसार होंगे एवं उन परंपराओं को भी बहाल किया जाएगा, जिन्हें पूर्ववर्ती आप सरकार ने खत्म कर दिया था। जानकारी के मुताबिक विधानसभा सत्र बुलाने के लिए एलजी की अनुमति लेनी होती है। सत्र बुलाने के पीछे भी कोई तार्किक वजह होनी चाहिए। लेकिन आप सरकार ने इस अनुमति से बचने के लिए किसी सत्र का सत्रावसान (सत्र समाप्ति की घोषणा) करना ही बंद कर दिया था। केवल बजट सत्र के लिए ही एलजी को फाइल भेजी जाती थी। इसके बाद हर सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर कभी भी दोबारा से सत्र बुला लिया जाता था।
एलजी वीके सक्सेना ने नियमों के उल्लंघन को लेकर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखे, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। इसी तरह आप सरकार ने विधानसभा सत्र की कार्यवाही से प्रश्नकाल भी खत्म कर दिया था। विशेष उल्लेख (नियम संख्या 280) के तहत राजधानी की समस्याओं को लेकर भी कभी चर्चा होती थी तो कभी बिना चर्चा के ही पढ़ी हुई मान ली जाती थी।
विपक्ष के अल्पकालिक चर्चा व नियम संख्या 54 के तहत ध्यानाकर्षण के प्रस्ताव भी आमतौर पर अस्वीकृत कर दिए जाते थे। लेकिन भाजपा सरकार के कार्यकाल में ऐसा नहीं होगा। बताया जाता है कि अब किसी भी सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं करके उसका सत्रावसान होगा। सत्र बुलाने के लिए एलजी से अनुमति ली जाएगी। हर सत्र में प्रश्नकाल होगा और विशेष उल्लेख में दिल्लीवासियों की समस्याओं पर भी चर्चा होगी। साथ ही विपक्ष को मार्शल आउट करने का बहाना नहीं ढूंढकर उसे भी बात रखने का मौका दिया जाएगा। हां, सत्र का समय भाजपा भी आप सरकार वाला यानी सुबह 11 बजे से ही रख सकती है। मालूम हो कि शीला दीक्षित सरकार में विधानसभा सत्र की कार्यवाही दोपहर दो बजे से शुरू होती थी जबकि आप सरकार ने इसे सुबह 11 बजे से कर दिया था। दूसरी तरफ नई सरकार का पहला विधानसभा सत्र सोमवार से शुरू होगा। इसमें पहले प्रोटेम स्पीकर नए स्पीकर को शपथ दिलाएंगे।

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