नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी के संशोधित लेआउट पर बवाल, मोमनाथल के ग्रामीणों का नोएडा प्राधिकरण में धरना
नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी सेक्टर-150 में ग्रामीणों ने बिल्डर पर अपनी 4000 आबादी की जमीन को संशोधित लेआउट प्लान में शामिल करने का आरोप लगाया है।

नोएडा। सेक्टर-150 की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के एससी-01 भूखंड के संशोधित लेआउट प्लान में गांव की आबादी और मुख्य सड़क को शामिल किए जाने के आरोपों को लेकर मोमनाथल गांव के ग्रामीणों ने नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिकायतों पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण बृहस्पतिवार को सेक्टर-96 स्थित प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन पहुंचे और जनसुनवाई कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिल्डर ने संशोधित लेआउट प्लान में करीब चार हजार लोगों की आबादी वाली जमीन को खाली भूखंड के रूप में दर्शाया है। गांव में आने-जाने के लिए बनी 12 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क को भी प्रस्तावित नक्शे में शामिल कर लिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह सड़क पिछले 15 वर्षों से गांव की आबादी का हिस्सा है और प्राधिकरण के पुराने लेआउट में भी इसका उल्लेख है। सड़क पर निर्माण कार्य के अलावा सीवर, जल निकासी और बिजली के खंभों जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं।
ग्रामीणों ने प्राधिकरण के नियोजन विभाग को लिखित शिकायत देकर संशोधित नक्शे की जांच कराने और आबादी व सड़क की वास्तविक स्थिति दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने बिल्डर और प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों के बीच मिलीभगत की आशंका जताते हुए कहा कि यदि प्रस्तावित लेआउट को इसी रूप में मंजूरी मिली तो गांव की आबादी और घरों पर संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्राधिकरण के वर्क सर्किल के अधिकारी जमीन अधिग्रहण के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के सेक्टर-78, 79, 150 और 152 के संशोधित लेआउट प्लान पर 11 अक्टूबर तक आपत्तियां मांगी थीं। इस दौरान कुल 225 आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनमें 100 से अधिक सेक्टर-150 के एससी-01 भूखंड से संबंधित बताई गई हैं।
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना लंबे समय से अटकी हुई है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य करीब 40 हजार फ्लैट खरीदारों को उनके घरों का मालिकाना हक दिलाने का रास्ता साफ करना है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को परियोजना के भूखंडों के संशोधित लेआउट प्लान नियमानुसार स्वीकृत करने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इससे बिल्डरों के पास फंसी रकम की वसूली में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के बीच ग्रामीणों की आपत्तियों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि लेआउट को मंजूरी देने से पहले आबादी और मुख्य सड़क की स्थिति का मौके पर सत्यापन कराया जाए, ताकि विकास परियोजना के नाम पर उनके आवासीय अधिकार प्रभावित न हों।




